केंद्र सरकार जारी वित्त वर्ष यानी 2024-25 के लिए कम क्वांटिटी में गोल्ड बॉन्ड जारी करने जा रही है. इसके पीछे गोल्ड की कस्टम ड्यूटी में की गई कटौती को बड़ी वजह बताया जा रहा है. दरअसल, कस्टम ड्यूटी में कटौती की घोषणा के बाद सोने के कीमतों में तेज गिरावट देखी जा रही है. इसका असर उसकी डिमांड पर पड़ना लाजमी है. खबरों की मानें तो सरकार गोल्ड की डिमांड में गिरावट और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनिश्चितता के कारण सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) कम मात्रा में जारी करने का मन बनाया है.
ईटी के एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस वित्त वर्ष 18500 करोड़ रुपये का गोल्ड बॉन्ड जारी कर सकती है. जबकि इसी वर्ष फरवरी में जो अंतरिम बजट लाया गया था उसमें 29638 करोड़ रुपये के गोल्ड बॉन्ड जारी किए जाने का अनुमान था. इस पर एक्सपर्ट्स ने भी अपनी कुछ राय रखी हैं.
वास्तव में कोई कटौती नहीं
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के लिए वाइस प्रेसिडेंट आकाश कंबोज का कहना है- सही मायनों में देखा जाए तो एसजीबी में कोई कटौती नहीं की गई है. सरकार ने इसके लिए 18500 करोड़ रुपये का बजट रखा है. यह 25-27 टन गोल्ड बॉन्ड के बराबर है. केवल 2023-24 को छोड़कर एसजीबी में कलेक्शन हमेशा लगभग 25 टन ही रहा है. इसलिए मुझे नहीं लगता कि एसजीबी बजट में कोई कटौती नहीं की गई है.
कम डिमांड का असर
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स के कमोडिटी व करेंसी डायरेक्टर नवीन माथुर ने कहा है- हाल में पेश किए गए यूनियन बजट में सरकार ने गोल्ड पर कस्टम ड्यूटी को घटाकर 15 से 6 परसेंट कर दिया था. घटी हुई कस्टम ड्यूटी का असर गोल्ड की डिमांड पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर एसजीबी की की कीमत लगभग 5 फीसदी घट गई है.
निवेशकों पर असर
2016-17 में जिन लोगों ने एसजीबी की सीरीज-1 में निवेश किया था वह 5 अगस्त 2024 को इसे कैश कर पाएंगे. यह इस सीरीज का आखिरी रिडेंप्शन होगा. तब बॉन्ड का इश्यू प्राइस 3119 रुपये था. अगर सोने का रेट 73000 रुपये ही रहा होता तो गोल्ड बॉन्ड निवेशकों को अपने निवेश पर 11.22 फीसदी का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ मिला होता. लेकिन अब अगर मौजूदा रेट पर वह अपना एसजीबी कैश करते हैं तो उन्हें लगभग 10.43 फीसदी के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ पर सेटल होना होगा.

