छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की आंतरिक राजनीतिक फिर टूटने के कगार पर आ गई है कई के खेमो में बाटी कांग्रेस अजीत जोगी के बगावत के इतिहास को दोहरा सकती है इस बार पूर्व मुख्यमंत्री टीएस सिहदेव के तेवर कांग्रेस को असहज कर रहे हैं

गत दिनों गुजरात के कांग्रेस अधिवेशन में अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के काम नहीं करने वालों को हटाने वाले बयान पर सिंहदेव की बेबाक टिप्पणी ने प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और भूपेश बघेल के साथ राहुल गांधी को भी निशाने पर ले लिया है। इससे पहले सिंहदेव साय सरकार के स्वास्थ सेवा और नक्सल नीति की सराहना कर चुके हैं।

सिंहदेव के निशाने पर बैज, बघेल और राहुल

गुजरात अधिवेशन में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि जो लोग पार्टी के काम में हाथ नहीं बटाते, उन्हें आराम करने की जरूरत है और जो जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं, उन्हें रिटायर हो जाना चाहिए। खड़गे के इस बयान पर पूर्व उप मुख्यमंत्री सिंहदेव ने टिप्पणी की तो राजनीति का पारा चढ़ गया। पूर्व उप मुख्यमंत्री का यह बयान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और भूपेश बघेल के साथ राहुल गांधी को भी कठघरे में खड़ा करता है।

छत्तीसगढ़ में लोकसभा और विधानसभा का चुनाव प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के चेहरे और नेतृत्व में लड़ा गया था। दोनों ही चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, राष्ट्रीय स्तर कांग्रेस का ग्राफ उठाने में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी विफल रहे हैं।

जो काम नहीं करते, वो खुद से नहीं छोड़ेंगे जगह

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि जो काम नहीं करते, वो खुद से कभी जगह नहीं छोड़ेंगे। पार्टी में प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन सिस्टम होना चाहिए। इसी के आधार पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वह 72 साल के हैं। उनमें अभी भी ऊर्जा है। कोई नेता किसी भी उम्र के हों, परफॉर्मेंस आधार होना चाहिए। कोई युवा है और परफॉर्म नहीं कर पा रहा है तो क्या मतलब?

सिंहदेव के बयान पर दीपक बैज की भी प्रतिक्रिया आई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में सभी उम्र के लोग काम कर रहे हैं। उदयपुर अधिवेशन में निर्णय लिया गया कि युवाओं को अवसर मिलेगा। छत्तीसगढ़ में भी युवाओं को आने वाले समय में अवसर मिलेगा

छत्तीसगढ में कांग्रेस के विभाजन का संकेत

राजनीति में सफलता और सक्रियता का पैमाना चुनाव में जीत-हार ही होती है। यही कारण है कि किसी राज्य में कोई पार्टी चुनाव हार जाती है तो उसका प्रदेश अध्यक्ष इस्तीफा देकर नैतिक जिम्मेदारी लेता है। यही स्थिति राष्टीय स्तर पर भी है। मगर, लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हार के बाद भी प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ऐसी कोई नैतिकता नहीं दिखाई।

वहीं, कांग्रेस को तीसरी बार में लोकसभा में सत्ता तक पहुंचाने में विफल रहे राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष बन गए और दीपक बैज अध्यक्ष बने हुए हैं, जबकि भूपेश बघेल को राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया। कांग्रेस में हासिए पर चल रहे सिंहदेव का ताजा बयान छत्तीसगढ में कांग्रेस के विभाजन का संकेत हो सकता है। छत्तीसगढ के बडे क्षेत्र पूरे सरगुजा संभाग में उनका खासा प्रभाव है। अगर ऐसा होता है तो अजीत जोगी के बाद प्रदेश में कांग्रेस के टूट की परिपाटी दोहराई जाएगी।

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