कोरबा। जिले की राजनीति इन दिनों नए समीकरणों की आहट महसूस कर रही है। रणनीतिकार के रूप में पहचान बना चुके सुरेंद्र प्रताप जायसवाल को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
लोकसभा चुनाव में सांसद ज्योत्सना महंत की जीत और रामपुर विधानसभा में विधायक फूल सिंह राठिया के चुनाव में अधिकृत चुनाव संचालक की भूमिका ने उन्हें जिले की राजनीति का ‘रणनीतिक चेहरा’ बना दिया।
अब जबकि दो नई संभावित विधानसभा सीटों को लेकर चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं, राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा सवाल उठ रहा है —
क्या संगठन इस बार सुरेंद्र प्रताप जायसवाल को सीधे मैदान में उतारेगा?
या फिर वरिष्ठ नेता चरणदास महंत के पुत्र सूरज महंत को संभावित रूप से आगे बढ़ाने की स्थिति में, उन्हें फिर से जीत की रणनीति तैयार करने की अहम जिम्मेदारी दी जाएगी?
पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि मजबूत संगठनात्मक पकड़ और चुनावी गणित की समझ रखने वाले चेहरे को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। ऐसे में आने वाले समय में यह तय होगा कि वे खुद दावेदारी पेश करेंगे या फिर किसी और की जीत के शिल्पकार बनेंगे।
कोरबा की राजनीति फिलहाल इसी सवाल के इर्द-गिर्द घूम रही है —
“रणनीतिकार खुद उम्मीदवार बनेंगे या फिर फिर से जीत की पटकथा लिखेंगे?” 🔥

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