बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में वैज्ञानिक अन्वेषण से मिली बड़ी सफलता, जेम क्वालिटी हीरों ने बढ़ाई उम्मीदें
रायपुर/महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से खनिज क्षेत्र के लिए एक बड़ी और उत्साहजनक खबर सामने आई है। सरायपाली क्षेत्र के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में किए गए वैज्ञानिक अन्वेषण के दौरान 200 टन खनिज सामग्री की प्रोसेसिंग से पांच हीरे प्राप्त हुए हैं। इनका कुल वजन 1.22 कैरेट है। विशेषज्ञ इसे राज्य और देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं, क्योंकि इससे क्षेत्र में बड़े हीरा भंडार मिलने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
एनएमडीसी और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (सीएमडीसी) की संयुक्त कंपनी NMDC-CMDC लिमिटेड ने इस खोज की आधिकारिक पुष्टि की है। कंपनी के अनुसार स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, जियोफिजिकल सर्वे तथा 500 मीटर गहरी एक्सप्लोरेटरी ड्रिलिंग के बाद संभावित हीरा क्षेत्र की पहचान की गई थी।
इसके बाद 200 टन खनिज सामग्री को मध्यप्रदेश के पन्ना स्थित डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट भेजा गया, जहां जांच के दौरान पांच हीरे प्राप्त हुए। कंपनी द्वारा 22 जून 2026 को जारी आधिकारिक पत्र में इस उपलब्धि की पुष्टि की गई।
पन्ना के स्ट्रॉन्ग रूम में रखे गए हीरे
कंपनी ने बताया कि NMDC-CMDC के पास हीरों को सुरक्षित रखने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसलिए सभी पांचों हीरों को एनएमडीसी के पन्ना स्थित स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित जमा कर दिया गया है।
दो जेम क्वालिटी सफेद हीरे मिले
प्राप्त हीरों में दो जेम क्वालिटी के सफेद हीरे शामिल हैं, जिनका वजन क्रमशः 0.19 और 0.06 कैरेट है। इसके अलावा एक पीला हीरा 0.32 कैरेट तथा दो भूरे रंग के हीरे 0.59 और 0.06 कैरेट वजन के मिले हैं।
खनिज विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक चरण में जेम क्वालिटी हीरों का मिलना अत्यंत सकारात्मक संकेत है और यह क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हीरा भंडार की संभावना को दर्शाता है।
क्या होते हैं जेम क्वालिटी हीरे?
जेम क्वालिटी हीरे उच्चतम गुणवत्ता के हीरे माने जाते हैं। इनमें बेहतर चमक, पारदर्शिता और आकर्षक रंग होता है, जिसके कारण इनका उपयोग आभूषण निर्माण में किया जाता है।
महासमुंद में मिले दोनों सफेद हीरे जेम क्वालिटी श्रेणी के हैं। इसके विपरीत नॉन-जेम क्वालिटी हीरों का उपयोग औद्योगिक कार्यों जैसे कटिंग टूल्स और मशीनरी में किया जाता है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
भारत दुनिया का सबसे बड़ा हीरा कटिंग और पॉलिशिंग हब है, लेकिन कच्चे हीरों के लिए अभी भी बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में हीरों की यह खोज आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई गति दे सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में व्यावसायिक खनन शुरू होता है तो राज्य में निवेश, रोजगार और राजस्व के नए अवसर पैदा होंगे।
मुख्यमंत्री ने जताई खुशी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा,
“महासमुंद में हीरों की प्राप्ति छत्तीसगढ़ के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह खोज राज्य की समृद्ध खनिज संपदा को रेखांकित करती है और विकास, निवेश तथा रोजगार की नई संभावनाओं के द्वार खोलती है।”
एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड ने राज्य सरकार से आगे की कार्यवाही के लिए मार्गदर्शन मांगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में खड़ा कर सकती है।
नारद मुनि न्यूज़ विशेष:
“महासमुंद की धरती से निकली हीरों की चमक अब छत्तीसगढ़ के विकास और समृद्धि की नई कहानी लिख सकती है।”
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