अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने छत्तीसगढ़ की महिला नेत्री राशि त्रिभुवन महिलांग को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त कर दिया है। नियुक्ति होते ही पार्टी के भीतर हलचल मच गई—और हो भी क्यों न, जिन नेता को जिला कांग्रेस कमेटी पहले ही छह साल के लिए निष्कासित कर चुकी थी, वही अब सीधे राष्ट्रीय मंच पर विराजमान हैं।
यह मामला कांग्रेस के अंदरूनी सिस्टम का ऐसा करिश्मा बन गया है, जहाँ जिला से बाहर, लेकिन दिल्ली में भीतर होने का फार्मूला सफल हो गया। कार्यकर्ता पूछ रहे हैं—अगर निष्कासन इतना ही हल्का था, तो छह साल की सज़ा क्यों? और अगर सज़ा सही थी, तो राष्ट्रीय जिम्मेदारी किस तर्क पर?
🧾 निष्कासन का पूरा मामला
जिला कांग्रेस कमेटी ने 5 फरवरी 2025 को आदेश जारी कर राशि त्रिभुवन महिलांग को संगठन विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था। आरोप था कि उन्होंने पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ जाकर चुनाव में बगावत की और एक निर्दलीय उम्मीदवार का खुलकर समर्थन किया। कांग्रेस की भाषा में इसे अनुशासनहीनता माना गया और कड़ी कार्रवाई की गई।
❓ अब नए आदेश से उठते सवाल
अब AICC के नए आदेश के बाद कांग्रेस की अनुशासन व्यवस्था पर सवालों की बरसात हो रही है। कार्यकर्ताओं में चर्चा है कि
क्या निष्कासन केवल कागज़ी था?
क्या दिल्ली में नियम अलग और जिला में अलग चलते हैं?
और सबसे बड़ा सवाल—अगर बगावत योग्यता है, तो फिर अनुशासन किस काम का?
😏 रोस्ट पंचलाइन:
कांग्रेस में अब सज़ा नहीं, “सीवी अपग्रेड” होती है—जितनी बड़ी बगावत, उतनी ऊँची पोस्ट!

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