लगातार बढ़ती सोना-चांदी की कीमतों और सख्त कानूनी प्रावधानों के बीच सराफा कारोबार दबाव में आता जा रहा है। इसी को लेकर रायपुर सराफा एसोसिएशन ने केंद्रीय बजट के संदर्भ में सरकार के समक्ष व्यावहारिक और कानूनी बदलावों की ठोस मांग रखी है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्म भंसाली और सचिव जितेन्द्र गोलछा का कहना है कि ज्वेलरी बिक्री पर नकद लेन-देन की सीमा मौजूदा परिस्थितियों में अप्रासंगिक हो चुकी है। जब 10 हजार रुपये में एक ग्राम सोना भी उपलब्ध नहीं है, तब 2 लाख रुपये की नकद सीमा व्यापार और उपभोक्ता—दोनों के लिए अव्यवहारिक बनती जा रही है।
पुराने जेवरों की खरीद को लेकर एसोसिएशन ने नकद सीमा 10 हजार से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग दोहराई है। उनका तर्क है कि आम नागरिक जब पुराने जेवर बेचने आता है, तो वह डिजिटल प्रक्रिया से सहज नहीं होता और व्यापारी भी अनावश्यक कानूनी जोखिम में फंस जाता है।
सबसे गंभीर चिंता बीएनएस की धारा 317 को लेकर सामने आई है, जो पूर्व में आईपीसी की धारा 411 थी और चोरी की वस्तुओं के निपटान से संबंधित है। सराफा कारोबारियों का कहना है कि पुराने जेवर खरीदते समय यह पहचानना संभव नहीं होता कि आभूषण चोरी का है या नहीं। इसके बावजूद ज्वेलर्स को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है, जो व्यापार के लिए गंभीर खतरा है।
एसोसिएशन ने इस संदर्भ में उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने इस धारा में संशोधन कर व्यापारियों को राहत दी है, जबकि केंद्र सरकार स्तर पर अब तक ऐसा कोई स्पष्ट समाधान नहीं आया है। रायपुर सराफा एसोसिएशन ने मांग की है कि इस संशोधन को पूरे देश में लागू किया जाए।
इसके अलावा, सोना-चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव को देखते हुए 6 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी को कम करने, ऑनलाइन लेन-देन पर लगने वाले शुल्क में कटौती करने और 3 प्रतिशत जीएसटी को घटाकर 2 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।
सराफा कारोबारियों का साफ कहना है—
यदि कानून और कर व्यवस्था को व्यवहारिक नहीं बनाया गया, तो महंगे होते सोने के साथ-साथ व्यापार करना भी आम व्यापारी के लिए असंभव होता जाएगा।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय बजट में सरकार सराफा उद्योग की इन मांगों को कितनी गंभीरता से लेती है।

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