कोरबा। पूर्व राजस्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल ने पत्रकार हित में एक संवेदनशील और सराहनीय पहल करते हुए ऐसी घोषणा की है, जिसकी पूरे पत्रकार जगत में चर्चा हो रही है। उन्होंने प्रेस क्लब कोरबा के किसी भी सदस्य पत्रकार के आकस्मिक निधन की स्थिति में उसके परिवार को 25 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करने का ऐलान किया है।
यह घोषणा केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि पत्रकारों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का भी संदेश देती है। जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं और समाज तथा शासन-प्रशासन के बीच एक मजबूत सेतु की भूमिका निभाते हैं। वे हर परिस्थिति में जनता की आवाज को शासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार पत्रकार कठिन परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और व्यक्तिगत जोखिमों के बीच अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में यदि किसी पत्रकार का असमय निधन हो जाए तो उसके परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट का बड़ा बोझ आ जाता है। इसी मानवीय संवेदना को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
पत्रकारों के योगदान को बताया अमूल्य
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि पत्रकार समाज की आंख और कान होते हैं। वे जनहित के मुद्दों को सामने लाकर लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं। इसलिए उनके परिवारों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर समाज को भी गंभीरता से सोचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह सहायता राशि भले ही किसी परिवार की सभी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकती, लेकिन संकट की घड़ी में यह एक मजबूत सहारा अवश्य बनेगी और पीड़ित परिवार को यह एहसास दिलाएगी कि समाज उनके साथ खड़ा है।
प्रेस क्लब ने जताया आभार
प्रेस क्लब कोरबा के पदाधिकारियों और सदस्यों ने जयसिंह अग्रवाल की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे पत्रकार हित में उठाया गया एक मानवीय और दूरदर्शी कदम बताया। पत्रकारों का कहना है कि आकस्मिक परिस्थितियों में मिलने वाली यह सहायता परिवारों को तत्काल राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
पत्रकार जगत में हो रही सराहना
जयसिंह अग्रवाल की इस घोषणा को पत्रकारों के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का प्रतीक माना जा रहा है। पत्रकार जगत का मानना है कि यदि अन्य जनप्रतिनिधि और सामाजिक संस्थाएं भी इसी प्रकार आगे आएं तो पत्रकार परिवारों को और अधिक सुरक्षा और सहयोग मिल सकेगा।
विशेष कथन
“पत्रकार केवल खबरें लिखने वाले लोग नहीं हैं, वे समाज की आवाज हैं। उनके परिवारों की चिंता करना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।”



