आम जनता रोज जाम में फंसी, वीआईपी भी वाकिफ़ पर सब बने अनजान
कोरबा शहर की ट्रैफिक समस्या दिन-ब-दिन विकराल होती जा रही है। ओवरब्रिज के पास लगा ट्रैफिक सिग्नल पिछले 5-6 महीनों से बंद पड़ा है। पहले जब रेड लाइट जलती थी तो लोगों को समझ में आ जाता था कि रेलवे फाटक बंद है, लेकिन अब सिग्नल बंद रहने से वाहन चालकों को कोई अंदाजा नहीं होता और लोग घंटों जाम में फंसे रहते हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह समस्या सिर्फ आम जनता की नहीं है। जिला प्रशासन के अफसर, महापौर और मंत्री लखनलाल देवांगन तक इसी रास्ते से गुजरते हैं। यानी वीआईपी लोगों को भी भली-भांति पता है कि सिग्नल महीनों से बंद है। बावजूद इसके, आज तक न नगर निगम और न ही रेलवे विभाग ने कोई कार्रवाई की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वीआईपी भी जानते हुए अनजान बने हुए हैं। “जब अफसर और नेता खुद रोज इस समस्या को देख रहे हैं, फिर भी कोई कदम नहीं उठा रहे, तो इसे सीधी लापरवाही और जनता से बेपरवाही ही कहा जाएगा।” वहीं एक यात्री ने तंज कसा, “सिग्नल तो बंद है ही, अफसरों और नेताओं की संवेदनशीलता भी बंद हो चुकी है।”
नागरिकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द से जल्द ट्रैफिक सिग्नल को दुरुस्त कर फाटक व्यवस्था ठीक नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
जनता का सीधा सवाल:
“आख़िर 5-6 महीने से वीआईपी चुप क्यों हैं? क्या उनकी चुप्पी प्रशासन को बचाने के लिए है या जनता की तकलीफ से उन्हें कोई मतलब ही नहीं?”


