पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस ‘मूषक थ्योरी’ को ऐसा घुमाया कि बहस धान से निकलकर दिशा-दशा तक पहुंच गई। उनका तंज—
“छत्तीसगढ़ के चूहे तो धान के कटोरे में पलते हैं, उन्हें भूख क्यों लगेगी? ये जरूर बाहर से आए होंगे—नागपुर या गुजरात से!”
नागपुर यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय, और गुजरात—जहाँ से सत्ता का केंद्र चमकता है। बघेल के मुताबिक ये चूहे इतने भूखे हैं कि 30 करोड़ का धान तो बस स्टार्टर है, अब पूरा प्रदेश कुतरने की तैयारी है।
🐱 सियासी चूहा-बिल्ली खेल: धान गायब, जवाब ग़ायब
एक तरफ धान की सुरक्षा पर सवाल, दूसरी तरफ जवाबों की चोरी। जांच की जगह जुमले, जिम्मेदारी की जगह राष्ट्रवाद, और भ्रष्टाचार की जगह—चूहे!
सवाल सीधा है:
क्या धान सच में चूहों ने खाया?
या फिर चूहों को ढाल बनाकर किसी ने हाथ साफ किया?
जब जवाब ढूंढने की बारी आई, तो सियासत ने चूहों को ही चुनावी पोस्टर बना दिया।
🧨 निष्कर्ष (रोस्टेड):
छत्तीसगढ़ में आज धान कम नहीं, बहाने ज्यादा हैं।
यहाँ चूहे सिर्फ अनाज नहीं कुतर रहे—सिस्टम, जवाबदेही और भरोसा भी कुतर रहे हैं।
और राजनीति? वह तो मूसलाधार तंज में कह रही है—दोषी पकड़ना मुश्किल है, चूहा पकड़ लो! 🐭🔥

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