नगर निगम के वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने बजट को पूरी तरह निराशाजनक, जनविरोधी और पुराने वादों की “कॉपी-पेस्ट” करार दिया है। उनका कहना है कि इस बजट में न तो शहर के वास्तविक विकास की स्पष्ट दिशा दिखाई देती है और न ही आम जनता की मूलभूत समस्याओं के समाधान का कोई ठोस खाका प्रस्तुत किया गया है।
जयसिंह अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पिछले बजट में किए गए अधिकांश वादे आज तक धरातल पर नहीं उतर पाए हैं। गरीब और वंचित वर्ग के लिए वार्ड स्तर पर अंतिम संस्कार हेतु लकड़ी उपलब्ध कराने की योजना केवल कागजों तक सीमित रही। वहीं छात्राओं के लिए मुफ्त बस सेवा का वादा भी अधूरा ही है।
उन्होंने कहा कि शहर के 67 वार्डों में पेयजल और स्ट्रीट लाइट की स्थिति खराब बनी हुई है, लेकिन बजट में इन गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। इसके विपरीत, निगम प्रशासन ऐसे योजनाओं पर ध्यान दे रहा है जो उसके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आते।
पूर्व मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि शहर की परिसंपत्तियों को निजी एजेंसियों को सौंपकर उनका व्यावसायीकरण किया जा रहा है, जिससे आम जनता को कोई लाभ नहीं बल्कि निजी कंपनियों को फायदा हो रहा है। उन्होंने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब अधिकांश कार्य आउटसोर्स किए जा रहे हैं, तो निगम के संसाधनों और कर्मचारियों की भूमिका क्या रह जाती है।
बुधवारी बाजार को निजी हाथों में देने के प्रस्ताव पर भी उन्होंने कड़ा विरोध जताया। उनका कहना है कि इससे छोटे फल-सब्जी विक्रेताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। कांग्रेस के विरोध के बाद इस प्रस्ताव को वापस लेना पड़ा, जो यह दर्शाता है कि निगम की नीतियां जनविरोधी हैं।
वहीं दूसरी ओर, महापौर संजू देवी राजपूत ने बजट का बचाव करते हुए कहा कि यह बजट जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला है और इसमें शहर के समग्र विकास के साथ-साथ नागरिकों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं के सुधार पर विशेष ध्यान दिया गया है।
👉 कुल मिलाकर, नगर निगम बजट को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे शहर की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है।


