उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहले एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया। स्वामी यशवीर महाराज के नेतृत्व में चल रहे ‘पहचान अभियान’ के दौरान शनिवार (28 जून) को दिल्ली-देहरादून हाईवे पर स्थित ‘पंडित जी वैष्णो ढाबा’ पर हंगामा मच गया।
स्वामी यशवीर की टीम ने जब ढाबे के कर्मचारियों से उनके आधार कार्ड मांगे, तो कर्मचारियों ने दस्तावेज दिखाने से इनकार कर दिया। शक होने पर टीम ने ढाबे पर लगे बारकोड को स्कैन किया, जिससे पता चला कि ढाबे का मालिक मुस्लिम समुदाय से है।
5000 लोगों की टीम कर रही जांच
आरोप है कि इसके बाद हिंदू संगठन की टीम ने एक कर्मचारी को जबरन कमरे में ले जाकर उसकी पहचान की पुष्टि करने के लिए उसकी पैंट उतारने की कोशिश की। इस घटना से ढाबे पर तनाव बढ़ गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।
स्वामी यशवीर महाराज ने कांवड़ मार्ग पर 5000 लोगों की एक टीम तैनात की है, जो ढाबों, होटलों, रेस्तरां और दुकानों पर जाकर कर्मचारियों और मालिकों की पहचान जांच रही है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर कोई अन्य समुदाय का व्यक्ति व्यवसाय न चला रहा हो।
ढाबे के मालिक पर मुस्लिम होने का आरोप
टीम का दावा है कि ‘पंडित जी वैष्णो ढाबा’ का मालिक मुस्लिम है और वहां काम करने वाले कर्मचारी भी मुस्लिम हैं, जो अपनी पहचान छिपाकर हिंदू नाम से ढाबा चला रहे हैं। स्वामी यशवीर ने ढाबे के मालिक को चेतावनी दी है कि वह 24 घंटे के भीतर ढाबे का नाम बदलकर अपने असली नाम पर रख ले, अन्यथा अगले दिन सुबह 10 बजे से ढाबे के बाहर धरना शुरू होगा। यह धरना तब तक जारी रहेगा, जब तक ढाबे का नाम नहीं बदला जाता।


