कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे से पहले ही प्रदेश कांग्रेस में घमासान मच गया है। राहुल गांधी महज तीन घंटे के लिए छत्तीसगढ़ आ रहे हैं, लेकिन उनके आगमन से पहले ही पार्टी के भीतर नाराजगी, गुटबाजी और उपेक्षा के आरोप खुलकर सामने आने लगे हैं।
पार्टी के कई पुराने और वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि जिन लोगों ने तीन-तीन पीढ़ियों तक कांग्रेस का झंडा उठाया, उन्हें राहुल गांधी से मिलने तक का मौका नहीं दिया जा रहा है। वहीं संगठन में ऐसे नेताओं को महत्व मिलने की चर्चा है जिनका कांग्रेस के पुराने संघर्षों से कोई खास नाता नहीं रहा।
“पुराने सिपाही बाहर, नए चेहरों की बहार”
नाराज नेताओं का कहना है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की टीम में ऐसे लोगों को जिम्मेदारियां दी गई हैं जो हाल के वर्षों में सक्रिय हुए हैं, जबकि दशकों से पार्टी का बोझ उठाने वाले नेताओं को किनारे कर दिया गया है। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने तो यहां तक कह दिया कि कांग्रेस अब कार्यकर्ताओं की नहीं, बल्कि “दरबारियों की पार्टी” बनती जा रही है।
अभनपुर का अग्रसेन भवन बना सियासत का अखाड़ा
राहुल गांधी की जिला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ प्रस्तावित बैठक के लिए अभनपुर स्थित अग्रसेन भवन को चुना गया है। यहां संगठनात्मक चर्चा और भोजन कार्यक्रम रखा गया है। लेकिन कार्यक्रम स्थल तय होते ही नए विवाद ने जन्म ले लिया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भोजन व्यवस्था को लेकर भी पार्टी के भीतर कानाफूसी शुरू हो गई है। हालांकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि कार्यक्रम में मांसाहारी भोजन की कोई आधिकारिक व्यवस्था नहीं है। सच क्या है, इसका खुलासा कार्यक्रम के बाद ही होगा।
राहुल के सामने ताकत दिखाने की होड़
राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस के अलग-अलग गुट अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुट गए हैं। भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, चरणदास महंत और दीपक बैज समर्थक खेमों की सक्रियता ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने तंज कसते हुए कहा, “राहुल गांधी तो तीन घंटे के लिए आ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस में कुर्सी और ताकत की लड़ाई तीन महीने से चल रही है।”
सवाल बड़ा है…
राहुल गांधी का यह दौरा संगठन को एकजुट करेगा या फिर कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को और उजागर करेगा? फिलहाल तो हालात यही बता रहे हैं कि राहुल के स्वागत से ज्यादा चर्चा इस बात की है कि उनके आसपास कौन दिखेगा और कौन बाहर रह जाएगा।
“कांग्रेस में इन दिनों विचारधारा से ज्यादा ‘वीआईपी पास’ की कीमत बढ़ गई है। पुराने कांग्रेसी दरवाजे पर खड़े हैं और नए चेहरे सीधे मंच तक पहुंच रहे हैं!” 😄


