कोरबा/रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के बीच छिड़ा विवाद अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रह गया है। यह विवाद अब “महंत बनाम संत” की लड़ाई का रूप ले चुका है। डॉ. महंत द्वारा स्वामी रामभद्राचार्य को भाजपा का प्रचारक बताते हुए उन्हें जगद्गुरु मानने से इंकार करने के बाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों मोर्चों पर घमासान मच गया है।
डॉ. चरणदास महंत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वयं जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने रामकथा की व्यासपीठ से खुली चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यदि चरणदास महंत को उनके जगद्गुरु होने पर संदेह है तो वे सामने आकर पूरी परीक्षा ले सकते हैं। जगद्गुरु ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि उनका आशीर्वाद उसी को मिलता है जो भगवान राम से प्रेम करता है।
मुख्यमंत्री ने भी साधा निशाना
विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री ने भी महंत के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे कांग्रेस की कथित सनातन विरोधी सोच से जोड़ दिया। भाजपा नेताओं ने भी इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए कांग्रेस पर संत समाज और सनातन परंपरा का अपमान करने का आरोप लगाया।
संत समाज में आक्रोश
अयोध्या समेत देश और प्रदेश के कई संत-महात्माओं ने डॉ. महंत के बयान पर नाराजगी जताई है। संत समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि किसी भी धार्मिक पीठ और जगद्गुरु की गरिमा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। कई संतों ने सार्वजनिक रूप से महंत के बयान की आलोचना करते हुए उनके लिए सद्बुद्धि की कामना की है।
कांग्रेस खुलकर आई बचाव में
विवाद के बीच कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता चरणदास महंत का खुलकर समर्थन किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि महंत ने किसी धर्म या संत समाज का अपमान नहीं किया, बल्कि राजनीतिक भूमिका निभाने वालों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का तर्क है कि लोकतंत्र में किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व के राजनीतिक आचरण पर सवाल उठाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है।
बीजेपी को मिला नया मुद्दा?
दूसरी ओर भाजपा इस विवाद को राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस बार-बार सनातन और संत समाज को लेकर विवादित टिप्पणियां करती रही है और यह बयान उसी मानसिकता का हिस्सा है। भाजपा अब इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर कांग्रेस को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही…
पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक गलियारों में एक ही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—क्या डॉ. चरणदास महंत ने स्वामी रामभद्राचार्य के बहाने भाजपा को निशाना बनाने की कोशिश की थी? और यदि ऐसा था, तो क्या यह राजनीतिक हमला अब कांग्रेस के लिए ही मुश्किल बनता जा रहा है?
संत समाज के विरोध और भाजपा के आक्रामक रुख के बाद यह बहस तेज हो गई है कि कहीं यह बयान कांग्रेस की कथित ‘सनातन विरोधी’ छवि को और मजबूत तो नहीं कर देगा। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कितना राजनीतिक असर डालेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
एक नजर में
🔹 चरणदास महंत ने रामभद्राचार्य को भाजपा का प्रचारक बताया
🔹 जगद्गुरु ने व्यासपीठ से दी खुली चुनौती
🔹 संत समाज ने जताया विरोध, सद्बुद्धि की कामना की
🔹 मुख्यमंत्री और भाजपा ने कांग्रेस को घेरा
🔹 कांग्रेस ने महंत के बयान का किया समर्थन
🔹 सवाल—क्या यह विवाद कांग्रेस के लिए राजनीतिक नुकसान का कारण बनेगा?

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