छत्तीसगढ़ में दिसंबर की सियासत अचानक गर्मा गई है। सरकार के दो वर्ष पूरे होने के साथ ही मंत्री परिषद के प्रदर्शन पर सवाल उठने लगे हैं, जबकि मुख्यमंत्री पर पार्टी हाईकमान का भरोसा पूरी तरह कायम बताया जा रहा है। लगातार विवादों में घिरे कुछ मंत्रियों की वजह से न केवल सरकार की छवि धूमिल हो रही है बल्कि संगठन के भीतर भी असंतोष बढ़ता दिख रहा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, बीते दिनों एक के बाद एक उठे विवादों ने सरकार की छवि पर सीधा असर डाला है। कुछ मंत्री ‘विवाद फैक्ट्री’ बन चुके हैं, जिनके निजी स्टाफ और निर्णयों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री की साफ-सुथरी छवि के कारण उन्हें हाईकमान का पूरा समर्थन हासिल है।

सूत्र बताते हैं कि मंत्री हटाने का दबाव तेजी से बढ़ा है, लेकिन मुख्यमंत्री पर किसी तरह का खतरा नहीं है। पार्टी शीर्ष नेतृत्व मंत्रियों के परफॉर्मेंस, विवादों और सार्वजनिक छवि की समीक्षा कर रहा है। आने वाले दिनों में कुछ बड़े फैसलों की संभावना जताई जा रही है।

विपक्ष ने भी हाल के विवादों को लेकर सरकार पर हमला तेज कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार नियंत्रण खो चुकी है और कई विभागों में भ्रष्टाचार तथा बदइंतजामी चरम पर है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि मंत्रियों की कार्यशैली ने सरकार की दो साल की उपलब्धियों को भी धूमिल किया है। ऐसे में संगठन चाहता है कि छवि सुधारने के लिए मंत्रिमंडल में फेरबदल कर ‘दागी’ चेहरों को हटाया जाए।

कुल मिलाकर, सियासत का पारा चढ़ चुका है—
सीएम सुरक्षित हैं, लेकिन मंत्रियों की कुर्सियाँ खतरे में हैं।

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