छत्तीसगढ़ की राजनीति में बीते कुछ दिनों से चल रही सरकार से नाराजगी की चर्चाओं पर आखिरकार सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने खुलकर विराम लगाने की कोशिश की है। मंगलवार को विष्णुदेव साय के साथ रायपुर विकास को लेकर हुई अहम बैठक के बाद बृजमोहन अग्रवाल ने साफ कहा— “मैं सरकार के खिलाफ नहीं हूं, मैं सरकार को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देता हूं।”
उन्होंने बार-बार पत्र लिखने को नाराजगी नहीं बल्कि सकारात्मक हस्तक्षेप बताया और विपक्ष पर करारा हमला बोला। सांसद का कहना था कि छत्तीसगढ़ में विपक्ष बंटा हुआ और बेहद कमजोर है, जनहित के मुद्दे उठाने में पूरी तरह विफल है। यही वजह है कि उन्हें ही सरकार को सही दिशा दिखाने के लिए पत्र लिखने पड़ रहे हैं।
हालांकि, कांग्रेस इस बयान को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि बृजमोहन अग्रवाल समेत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को अपनी ही सरकार पर भरोसा नहीं, इसलिए पत्रों के जरिए असंतोष सामने आ रहा है।
गौरतलब है कि 2023 में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं—राजेश मूणत, अजय चंद्राकर, अमर अग्रवाल और बृजमोहन अग्रवाल—की नाराजगी की चर्चाएं समय-समय पर उठती रही हैं। खुद बृजमोहन अग्रवाल पिछले दो वर्षों में आठ बार सरकार को पत्र लिख चुके हैं, जिसे कांग्रेस ने “अविश्वास का प्रमाण” बताया।
अब बृजमोहन अग्रवाल कांग्रेस को कमजोर विपक्ष बताकर खुद को जनहित में सरकार का मार्गदर्शक बता रहे हैं। लेकिन राजनीतिक गलियारों में सवाल गूंज रहा है—
क्या वाकई विपक्ष की कमजोरी के कारण सत्ता पक्ष के नेताओं को अपनी ही सरकार की खामियां उजागर करनी पड़ रही हैं, या यह भीतरखाने की असहजता का संकेत है?

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