उद्यान, तालाब, पार्क, सामुदायिक भवन, स्टेडियम और बस स्टैंड भी दिए जा सकेंगे पट्टे पर
छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों को अपनी अचल संपत्तियों के बेहतर उपयोग और राजस्व बढ़ाने के लिए बड़ा अधिकार दिया है। राज्य में “छत्तीसगढ़ नगरपालिका (अचल संपत्ति व्ययन) नियम 2026” लागू कर दिए गए हैं, जिसके तहत अब नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतें अपनी अचल संपत्तियों का आवंटन और पट्टे पर हस्तांतरण ई-निविदा प्रक्रिया के माध्यम से कर सकेंगी।
नए नियमों के अनुसार सार्वजनिक हित और आय सृजन के उद्देश्य से उद्यान, तालाब, पार्क, सामुदायिक भवन, सार्वजनिक शौचालय, खेल मैदान, ऑडिटोरियम, स्टेडियम तथा बस स्टैंड जैसी संपत्तियों को निर्धारित शर्तों के तहत पट्टे पर दिया जा सकेगा।
ई-निविदा से होगा चयन
संपत्ति का आवंटन केवल पारदर्शी ई-निविदा प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। सबसे अधिक बोली लगाने वाले पात्र आवेदक को प्राथमिकता मिलेगी। इससे मनमाने आवंटन पर रोक लगेगी और निकायों की आय में वृद्धि होने की संभावना है।
30 वर्ष तक का पट्टा
नियमों के तहत प्रारंभिक रूप से संपत्तियां 30 वर्ष तक के लिए पट्टे पर दी जा सकेंगी। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नवीनीकरण भी संभव होगा। पट्टाधारी को संपत्ति का रखरखाव, मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
री-डेवलपमेंट का भी अधिकार
स्थानीय निकायों को अपनी पुरानी या अनुपयोगी संपत्तियों के पुनर्विकास (री-डेवलपमेंट) की योजना तैयार करने का अधिकार भी दिया गया है। हालांकि किसी भी पुनर्विकास परियोजना से पहले प्रभावित हितधारकों को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य होगा।
अवधि समाप्त होते ही संपत्ति वापस
पट्टे की अवधि समाप्त होने या अनुबंध निरस्त होने की स्थिति में संबंधित संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व और कब्जा स्वतः नगरीय निकाय को वापस मिल जाएगा। इसके लिए किसी अतिरिक्त मुआवजे का प्रावधान नहीं होगा।
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