उपमुख्यमंत्री अरुण साव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की छत्तीसगढ़ी टिप्पणी “बेंदरा ल राजा बना दिस” अब सियासी विवाद से आगे बढ़कर सामाजिक आक्रोश का रूप ले चुकी है।
साहू समाज ने इस बयान को स्वाभिमान और गौरव पर सीधा हमला बताते हुए भूपेश बघेल से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
⚠️ 10 दिन का अल्टीमेटम
साहू समाज के प्रदेशाध्यक्ष नीरेन्द्र साहू ने साफ कहा है कि यदि 10 दिनों के भीतर माफी नहीं मांगी गई, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा। समाज ने पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपकर कानूनी कार्रवाई की मांग करने का भी निर्णय लिया है।
🗣️ भूपेश का बयान क्या था?
बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र में भूपेश बघेल ने अरुण साव पर तंज कसते हुए कहा—
“जंगल में शेर के बजाय बंदर को राजा बना दिया गया… हिरण का बच्चा बचा या नहीं, बंदर कहता है—मेरे प्रयास में कमी नहीं होनी चाहिए।”
बघेल ने नगरीय निकाय, पीडब्ल्यूडी और जल जीवन मिशन में काम ठप होने के आरोप भी लगाए।
⚖️ सत्ता पक्ष का पलटवार
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वरिष्ठ नेता होने के नाते भाषा की मर्यादा जरूरी है।
वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बयान को अमर्यादित बताते हुए कहा कि भूपेश ने भ्रष्टाचार में भी सीमा नहीं समझी—दूसरों के परिवार पर टिप्पणी उन्हें भी पसंद नहीं आएगी।
🛡️ सिंहदेव का बचाव
पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव भूपेश के बचाव में उतरे। उन्होंने कहा कि यह पूरे समाज पर टिप्पणी नहीं, बल्कि एक व्यक्ति पर कहा गया कथन हो सकता है; एक चूक हुई है, जिसे भूपेश भी समझते होंगे।
🧨 राजनीति गरम, समाज सख्त
यह विवाद अब राजनीतिक बयानबाज़ी से निकलकर सामाजिक सम्मान का मुद्दा बन चुका है।
माफी या आंदोलन—अब गेंद भूपेश बघेल के पाले में है।


