कोरबा। शहर में रेल विस्तार की मांग को लेकर वर्षों से सक्रिय रेल संघर्ष समिति इन दिनों एक नए ट्रैक पर दौड़ती नजर आ रही है—“ज्ञापन दो, फोटो लो” अभियान पर।
बताया जाता है कि करीब दो साल पहले जब भाजपा की कद्दावर नेता Saroj Pandey को रेल विस्तार के लिए ज्ञापन सौंपा गया था, तब भी समिति के चेहरों पर उम्मीद कम और कैमरे की चमक ज्यादा दिख रही थी।
रेल आए या न आए, लेकिन हर बड़े नेता के साथ फोटो सेशन जरूर आ रहा है। शहर में चर्चा है कि समिति के पास ज्ञापन का ड्राफ्ट फिक्स है, बस नेता बदलते हैं और बैकग्राउंड में बैनर अपडेट हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “रेल संघर्ष” अब “रेल सेल्फी अभियान” में तब्दील हो चुका है। जहां एक तरफ आम जनता ट्रेन के इंतजार में प्लेटफॉर्म की तरह खड़ी है, वहीं समिति के सदस्य नेताओं के साथ मुस्कुराते हुए कैमरे में कैद हो रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में भी यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर संघर्ष ज्यादा हो रहा है या सिर्फ फोटोशूट का विस्तार?
फिलहाल, कोरबा की जनता रेल की सीटी सुनने को तरस रही है, लेकिन समिति की फोटो गैलरी जरूर दिन-ब-दिन लंबी होती जा रही है। 🚉📷



