कोरबा। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के कोरबा–गेवरा रोड रेलखंड पर स्थित इंदिरा नगर दुर्पा रोड अब विस्फोटक मोड़ पर पहुंच चुका है। रेलवे के अल्टीमेटम की घड़ी टिक-टिक कर रही है—अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। रेलवे ने साफ शब्दों में चेतावनी दे दी है: “नोटिस दिया है, तो अमल भी होगा।”
South East Central Railway के रेलपथ विभाग ने 705/8 और 708/10 किलोमीटर के बीच आने वाली जमीन पर बसे लोगों को दूसरी बार नोटिस जारी कर 24 दिसंबर तक स्वयं हटने का आदेश दिया है। चेतावनी सीधी है—सामान नहीं हटाया तो 30 दिसंबर से रेलवे अपनी कार्रवाई शुरू करेगा। सुरक्षा बल को पहले ही अलर्ट कर दिया गया है।
रेलवे ने यह भी दो टूक कह दिया है कि कार्रवाई के दौरान किसी तरह के नुकसान की जिम्मेदारी पूरी तरह नोटिसधारकों की होगी, रेलवे पर कोई जवाबदेही नहीं होगी।
इधर, प्रभावित परिवार दर-दर भटकते रहे—रेलवे अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगी, ओवरब्रिज के नीचे चक्काजाम कर दबाव बनाने की कोशिश भी हुई, प्रशासन ने आश्वासन देकर भीड़ को शांत तो कर दिया… लेकिन नतीजा शून्य।
अब हालात ऐसे हैं कि इंदिरा नगर के कई परिवारों ने मजबूरी में सामान शिफ्ट करने की मानसिक तैयारी शुरू कर दी है। डर, अनिश्चितता और नुकसान की आशंका हर चेहरे पर साफ दिख रही है।
इस बीच 30 दिसंबर की कार्रवाई को लेकर रेलवे के सीपीआरओ ने फिर वही सख्त रुख दोहराया—“नोटिस है, तो कार्रवाई तय है।”
हालांकि, यह भी सामने आया है कि इस संवेदनशील मामले पर केबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन ने रेलवे के संभागीय प्रबंधक से चर्चा की है, लेकिन ज़मीन पर राहत की कोई ठोस तस्वीर अभी तक नहीं दिख रही।
अब सवाल सीधा है—
क्या 30 दिसंबर इंदिरा नगर के लिए उजड़ने की तारीख बनेगा,
या आख़िरी वक्त पर कोई चमत्कार होगा?

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