कोरबा शहर की बदहाल सड़कों ने अब यह साफ कर दिया है कि नगर निगम को जनता की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं। गड्ढों में तब्दील सड़कें रोज़ हादसों को न्योता दे रही हैं, लेकिन नगर निगम आंख मूंदे बैठा है। ऐसा लगता है मानो शहर को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया हो।
हर साल करोड़ों रुपये सड़क मरम्मत के नाम पर खर्च दिखाए जाते हैं, मगर ज़मीनी हकीकत यह है कि सड़कें पहले से ज्यादा जर्जर होती जा रही हैं। सवाल उठना लाज़मी है—
👉 नगर निगम के इंजीनियर कहां हैं?
👉 मरम्मत के नाम पर पैसा किसकी जेब में गया?
शहर की मुख्य सड़क हो या मोहल्ले की गलियां, हर जगह एक ही तस्वीर—उखड़ी डामर, गहरे गड्ढे और जानलेवा सफर। दोपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे हैं, एंबुलेंस और स्कूली वाहन तक इन गड्ढों में हिचकोले खा रहे हैं। क्या नगर निगम किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?
जनता में गुस्सा उबल रहा है। लोग कह रहे हैं कि नगर निगम सिर्फ टैक्स वसूली में सक्रिय है, काम के वक्त पूरी तरह निष्क्रिय। निरीक्षण के नाम पर सिर्फ औपचारिकता, फोटो खिंचवाकर जिम्मेदारी खत्म कर ली जाती है।
अब सवाल सिर्फ सड़क का नहीं, नगर निगम की कार्यप्रणाली और ईमानदारी का है। अगर जल्द ही स्थायी और गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण नहीं हुआ, तो यह माना जाएगा कि नगर निगम ने जानबूझकर शहर को खतरे में डाल रखा है।
कोरबा की जनता अब चुप नहीं रहेगी।
अब मांग है—
✊ जवाबदेही तय हो
✊ भ्रष्टाचार की जांच हो
✊ तुरंत पक्की सड़कें बनाई जाएं


