स्कूल और वाचनालय के आसपास गुटखा-सिगरेट पर कार्रवाई, लेकिन शराब दुकान को लेकर उठ रहे सवाल
कोरबा। आबकारी मंत्री के गृह जिले कोरबा में नशे के कारोबार को लेकर प्रशासन की कार्रवाई पर अब सवाल उठने लगे हैं। पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में नगर निगम के अमले ने चाय-पान दुकानों, ठेलों और छोटे फुटकर कारोबारियों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए सिगरेट, गुटखा, तंबाकू सहित अन्य सामान जब्त किया। कार्रवाई के दौरान कई दुकानों से सामान उठाकर निगम के वाहनों में ले जाने की बात सामने आई है।
फुटकर कारोबारियों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उनसे सामान तो जब्त किया गया, लेकिन कितना सामान जब्त किया गया, इसकी लिखित जानकारी या जब्ती सूची उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं कई दुकानदारों पर जुर्माना भी लगाया गया। कारोबारियों का कहना है कि कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से जब्ती और कार्रवाई की जानकारी भी दी जानी चाहिए।
घंटों चली कार्रवाई, छोटे कारोबारियों में मचा हड़कंप
पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में हुई कार्रवाई को लेकर छोटे व्यापारियों में काफी नाराजगी दिखाई दी। दुकानदारों का कहना है कि निगम का अमला जिस तरह से कार्रवाई कर रहा था, उससे ऐसा माहौल बन गया जैसे कोई बेहद बड़ा अपराध पकड़ा गया हो। सवाल यह है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ था तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए, लेकिन छोटे कारोबारियों के साथ कार्रवाई की प्रक्रिया भी स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए।
जहां गुटखा-सिगरेट पर कार्रवाई, वहीं शराब दुकान को लेकर सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल उस स्थान को लेकर उठ रहा है जहां फुटकर दुकानदारों पर कार्रवाई की गई। स्थानीय लोगों के अनुसार गौरीशंकर मंदिर के समीप निगम का वाचनालय है और इसी क्षेत्र के आसपास सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल भी संचालित होता है। ऐसे में नशे से जुड़े सभी प्रकार के कारोबार को लेकर प्रशासन से समान रूप से कार्रवाई की अपेक्षा की जा रही है।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि स्कूल और सार्वजनिक संस्थानों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर इतनी सख्ती है, तो उसी क्षेत्र में संचालित शराब दुकान को लेकर प्रशासन की नीति क्या है? क्या उसके संबंध में भी वही नियम और मानदंड लागू होते हैं? यदि दूरी अथवा अन्य नियमों का उल्लंघन नहीं है तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
गरीब की दुकान पर कार्रवाई, बड़े कारोबार पर सवाल क्यों?
फुटकर व्यापारियों का कहना है कि रोज कमाकर परिवार चलाने वाले छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई करना आसान है, लेकिन नशे के बड़े कारोबार और शराब बिक्री के मामले में प्रशासन को समान कठोरता दिखानी चाहिए। उनका सवाल सीधा है—कानून सबके लिए एक है तो कार्रवाई का पैमाना भी एक जैसा क्यों नहीं दिखता?
आबकारी मंत्री के गृह जिले में उठ रहा बड़ा सवाल
कोरबा जिले से ही प्रदेश के आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन आते हैं। ऐसे में जिले में नशे से जुड़े कारोबार और उस पर प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सरकार की नीति पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। छोटे फुटकर कारोबारियों पर कार्रवाई के बीच शराब कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशासन और आबकारी विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि निगम और आबकारी विभाग पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में हुई कार्रवाई की पूरी जानकारी सार्वजनिक करते हैं या नहीं—कितना सामान जब्त हुआ, किन धाराओं के तहत कार्रवाई हुई, कितने दुकानदारों पर जुर्माना लगाया गया और उसी क्षेत्र में संचालित शराब दुकान को लेकर नियमों की स्थिति क्या है।
नारद मुनि न्यूज़ की पड़ताल का सवाल:
छोटे दुकानदारों पर कानून का डंडा चले तो बड़े नशे के कारोबार पर भी वही कानून उतनी ही ताकत से लागू होगा या नहीं?


