भाजपा की महापौर के निगम में नाम पट्टिका हटने पर चर्चा, काम आज भी बोलता है
कोरबा – नगर निगम में दो बार पार्षद रहे विकास अग्रवाल और उनकी पत्नी आरती अग्रवाल ने अपने कार्यकाल में साकेतनगर वार्ड की तस्वीर बदलने का काम किया। वरिष्ठ भाजपा नेता राजबीर अग्रवाल के पुत्र एवं पुत्रवधू के रूप में राजनीतिक विरासत के साथ जनसेवा को आगे बढ़ाने वाले इस पार्षद दंपति ने रचनात्मक कार्यों से अपनी विशेष पहचान बनाई।
अपने कार्यकाल के दौरान साकेतनगर में विकास कार्यों, बुनियादी सुविधाओं और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहते हुए दोनों ने वार्डवासियों का भरोसा जीता। यही कारण है कि आज भी क्षेत्र के लोग उन्हें मसीहा के रूप में देखते हैं। पार्षद रहते हुए आरती अग्रवाल का नाम महापौर की दौड़ में सबसे आगे चलना, उनकी लोकप्रियता और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण माना जाता है।
वार्ड में नगर निगम द्वारा विकास अग्रवाल एवं आरती अग्रवाल के नाम की पट्टिका बोर्ड लगाया जाना उस समय उनकी सक्रिय भूमिका का प्रतीक था। हाल ही में उक्त बोर्ड को हटाए जाने के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। इस पूरे मामले पर पूर्व पार्षद विकास अग्रवाल ने सहज प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बोर्ड निगम ने लगाया था और निगम ही हटा रहा है। वर्तमान में वे जनप्रतिनिधि नहीं हैं, संभवतः यही कारण हो सकता है।
हालांकि, चूंकि नगर निगम में भाजपा की महापौर पदस्थ हैं, ऐसे में कार्यकर्ताओं और नागरिकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इस तरह की पट्टिका हटाने से पहले व्यापक विचार नहीं किया जाना चाहिए था। लोगों का कहना है कि बोर्ड भले ही हट जाए, लेकिन वर्षों के काम और भरोसे को हटाना आसान नहीं होता।
गौरतलब है कि श्री राजबीर अग्रवाल जनसंघ काल से भाजपा से जुड़े हुए हैं और सामाजिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते रहे हैं। ऐसे में साकेतनगर में यह आम चर्चा है कि राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन काम से बनी पहचान लंबे समय तक कायम रहती है।


