कोरबा – साधु-संतों के अपमान के विरोध में भारतीय जनता युवा मोर्चा, जिला कोरबा द्वारा विगत दिनों आयोजित पुतला दहन कार्यक्रम ने जहां सियासी संदेश देने की कोशिश की, वहीं अंदरखाने संगठनात्मक क्षमता को लेकर कई असहज सवाल भी खड़े कर दिए।
बताया जाता है कि यह विरोध-प्रदर्शन जिला मंत्री वैभव शर्मा के नेतृत्व में तय किया गया था, लेकिन सत्ता में होने के बावजूद कार्यक्रम के लिए कार्यकर्ताओं की अपेक्षित भीड़ जुटाने में युवा मोर्चा नाकाम नजर आया। स्थिति यह रही कि बाद में भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी को स्वयं अपनी टीम और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालना पड़ा।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री टी. एस. सिंह देव का पुतला दहन किया गया, लेकिन संगठन की जमीन पर पकड़ को लेकर तस्वीर उत्साहजनक नहीं दिखी।
राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि
अगर एक तयशुदा कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को एकत्र करना चुनौती बन जाए, तो क्या वही चेहरा युवा मोर्चा का जिला अध्यक्ष बनने के लिए उपयुक्त माना जा सकता है?
सूत्रों का कहना है कि मंच पर मौजूद कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी आपस में नेतृत्व की कमजोरी को लेकर चर्चा करते नजर आए। सत्ता पक्ष होने के बावजूद यदि नेतृत्व को बार-बार वरिष्ठों के सहारे कार्यक्रम बचाना पड़े, तो यह संगठनात्मक अलार्म से कम नहीं माना जा रहा।
अब सवाल सिर्फ पुतला दहन का नहीं, बल्कि उस नेतृत्व क्षमता का है, जिस पर युवा मोर्चा के भविष्य की जिम्मेदारी सौंपी जानी है।
क्या सिर्फ नजदीकी और पहचान के आधार पर पद तय होंगे, या संगठन जमीन पर पकड़ भी देखेगा—यह आने वाले फैसलों में साफ होगा।

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