कोरबा –  छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अब बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत साफ दिखने लगे हैं। खासकर कोरबा शहर में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि पार्टी के सीनियर लीडर मैदान से गायब क्यों नजर आ रहे हैं? लंबे समय से सक्रिय रहे वरिष्ठ चेहरे अब न तो सड़कों पर दिख रहे हैं और न ही संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी मौजूदगी पहले जैसी रही है।
कोरबा कांग्रेस में श्याम सुंदर सोनी, संतोष राठौर और सुरेंद्र प्रताप जायसवाल जैसे अनुभवी नेताओं की चुप्पी पर कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पार्टी अब जानबूझकर पुराने चेहरों को पीछे कर नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है?
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले चुनावी दौर को देखते हुए कांग्रेस अब फ्रेश और एनर्जेटिक नेतृत्व पर फोकस कर रही है। इसी कड़ी में संगठन की कमान अब नए चेहरों को सौंपी जा रही है।
नए लीडर होंगे फ्रंटफुट पर
कोरबा जिले में कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुकेश राठौर को संगठन को धार देने की अहम जिम्मेदारी मिली है। वहीं जमीनी स्तर पर कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पालूराम साहू को सक्रिय भूमिका में लाया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि ये चेहरे सीधे जनता से जुड़े हैं और चुनावी मोर्चे पर कांग्रेस को नई ऊर्जा दे सकते हैं।
पार्टी रणनीतिकारों का कहना है कि अब कांग्रेस सिर्फ नामों पर नहीं, बल्कि काम और जमीन पर पकड़ रखने वाले नेताओं पर भरोसा करेगी। सपोर्ट सिस्टम में भले ही सीनियर नेताओं की भूमिका बनी रहे, लेकिन सामने की कमान अब नए चेहरों के हाथ में होगी।
👉 सियासी संकेत साफ हैं:
छत्तीसगढ़ कांग्रेस, खासकर कोरबा में, अब पुराने ढर्रे से बाहर निकलकर नए नेतृत्व और नए तेवरों के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है। सवाल सिर्फ इतना है—क्या सीनियर लीडर इस बदलाव को स्वीकार करेंगे या अंदरखाने असंतोष उभरेगा?

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