प्रदेश में अब प्ले स्कूलों की मनमानी पर सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी प्ले स्कूल बिना जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में पंजीयन कराए संचालित नहीं होगा।
नई व्यवस्था के अनुसार:
3 साल से कम उम्र के बच्चों को अब प्ले स्कूल में प्रवेश नहीं मिलेगा।
स्कूल का समय 3 से 4 घंटे का ही होगा।
हर प्ले स्कूल को सरकार की गाइडलाइन का अनुपालन करना होगा।
बिना पंजीयन चल रहे कई प्ले स्कूलों पर अब कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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📌 अभिभावक-शिक्षक समिति बनाना अनिवार्य
हर प्ले स्कूल में Parent-Teacher Committee (PTC) का गठन एक महीने के भीतर करना होगा।
समिति में 75% महिलाएँ होंगी।
अध्यक्ष माननीय पालकों में से चुना जाएगा।
स्कूल शुरू होने के एक महीने के भीतर गठित समिति की रिपोर्ट DEO को भेजना अनिवार्य होगा।
यदि किसी प्ले स्कूल ने समय पर PTC नहीं बनाई या रिपोर्ट नहीं भेजी तो उसका पंजीयन रद्द किया जा सकता है।
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📛 गाइडलाइन नहीं, इसलिए मनमानी!
राजधानी व अन्य शहरों में बिना मानक के सैकड़ों प्ले स्कूल चल रहे थे।
गलियों–मोहल्लों में बिना सुरक्षा मानक के स्कूल खुल गए थे।
कई जगह 2 कमरों में 40-50 बच्चों को बैठाकर फीस वसूली की जा रही थी।
न सुरक्षा, न खेल-कूद, न प्रशिक्षित शिक्षक—सब कुछ धांधली पर चल रहा था।
इन्हीं शिकायतों के बाद सरकार ने गाइडलाइन लागू करने और पंजीयन अनिवार्य करने का निर्णय लिया है।
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📢 नया नियम लागू: 3 महीने की डेडलाइन
जिले के सभी प्ले स्कूलों को 3 महीने के भीतर DEO ऑफिस में पंजीयन कराना अनिवार्य है।
अनुपालन न होने पर कार्रवाई तय है—स्कूल सील भी किए जा सकते हैं।


