कोरबा। नगर निगम की सफाई व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। रविशंकर शुक्ला नगर स्थित एस.एल.आर.एम. सेंटर में कार्यरत सफाई मित्र राजकुमारी यादव ने सुपरवाइजर विजयलक्ष्मी तिवारी पर पद के दुरुपयोग, पैसे लेकर फर्जी हाजिरी भरने और शिकायत करने पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि सात वर्षों की सेवा में उस पर कभी कोई शिकायत नहीं हुई, इसके बावजूद उसे अपना सेंटर हटाकर दूसरे सेंटर भेज दिया गया।
आवेदन में आरोप है कि सुपरवाइजर द्वारा खुलेआम धन वसूली की जा रही है, जिससे सेंटर के कर्मचारी भयभीत हैं। जो भी बोलने की हिम्मत करता है, उसे नौकरी से हटाने की धमकी दी जाती है। पीड़िता ने बताया कि उसने 17 नवंबर 2025 और 30 दिसंबर 2025 को निगम में लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि संबंधित सुपरवाइजर को संरक्षण इसलिए मिल रहा है क्योंकि निगम के नोडल अधिकारी से पारिवारिक संबंध बताए जा रहे हैं। पीड़िता का दावा है कि पहले भी उक्त सुपरवाइजर को दो सेंटर से हटाया गया था, यहां तक कि एक वर्ष के लिए कार्य से पृथक किया गया, लेकिन कथित संरक्षण के चलते पुनः उसी क्षेत्र में पदस्थ कर दिया गया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि


👉 क्या नगर निगम में शिकायत करने की सजा शिकायतकर्ता को ही मिलती है?
👉 क्या रिश्तेदारी और रसूख के आगे नियम-कानून बौने हो चुके हैं?
पीड़िता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सुपरवाइजर को तत्काल हटाया जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो, ताकि कर्मचारियों में भरोसा बहाल हो सके।
कोरबा में यह मामला अब सिर्फ एक कर्मचारी की पीड़ा नहीं, बल्कि निगम की कार्यप्रणाली और जवाबदेही की अग्निपरीक्षा बन चुका है।

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