कोरबा – कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो चले जाने के बाद भी शहर की रगों में बस जाते हैं। अशरफ मेमन भी उन्हीं नामों में से एक हैं। आज भी शहर की गलियों, चाय की दुकानों और कबाड़ के कारोबार से जुड़े लोगों की बातचीत में उनका ज़िक्र ज़िंदा है।
कबाड़ के व्यवसाय में अशरफ मेमन ने अपनी अलग पहचान बनाई थी। कारोबार में ऊँचाइयों तक पहुँचने के बावजूद उनका स्वभाव हमेशा सादा और अपनापन भरा रहा। आम लोगों के बीच बैठना, चाय की दुकान पर कुर्सी डालकर हालचाल पूछना और हर किसी से हँसकर बात करना उनकी आदत में शुमार था।

मज़ाकिया मिज़ाज, बेबाक अंदाज़ और मजबूत रुतबा—यही अशरफ मेमन की पहचान थी। शहर में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने उनका नाम न सुना हो या उन्हें न जाना हो। वे सिर्फ एक व्यापारी नहीं, बल्कि शहर की रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा थे।
आज भी वही कुर्सी, वही चाय की दुकान और वही सड़कें उन्हें याद करती हैं। अशरफ मेमन भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी यादें और उनका अंदाज़ आज भी शहर में ज़िंदा है।
लेकिन उनकी विदाई भी उतनी ही रहस्यमयी रही, जितनी उनकी ज़िंदगी चर्चित थी। संदिग्ध परिस्थितियों में हुई उनकी मौत आज भी कई सवाल छोड़ गई है। यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि शहर के ज़ेहन में दर्ज एक ऐसा अनसुलझा अध्याय है, जिसे लोग आज भी भूल नहीं पाए हैं।
वाकई,
शहर आज भी उन्हें ढूंढता है… अशरफ मेमन।


