कोरबा  – कुछ दौर ऐसे होते हैं, जिनकी यादें वक्त बीतने के बाद भी गरीब की सांसों में जिंदा रहती हैं। पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल का कार्यकाल भी ऐसा ही एक दौर था—जब गरीब को यह डर नहीं होता था कि आज उसकी झोपड़ी टूटेगी, उसका चूल्हा बुझेगा या उसकी रोज़ी छिन जाएगी।
उस समय झुग्गी-बस्तियों में रातें सुकून की होती थीं। मां अपने बच्चों को सीने से लगाकर सोती थी, यह सोचकर नहीं कि सुबह बुलडोज़र आएगा, बल्कि यह भरोसा लेकर कि जय सिंह भैया हैं, तो कोई अन्याय नहीं होगा।
उनके पूरे कार्यकाल में किसी गरीब की झोपड़ी नहीं टूटी—क्योंकि उन्होंने कभी विकास को इंसानियत से ऊपर नहीं रखा।
निहारिका टॉकीज की चौपाटी आज भी उस दौर की गवाही देती है। राखी हो या होली, निहारिका गार्डन के सामने मेहनतकश लोग अपनी छोटी-छोटी दुकानें सजाते थे। किसी निगम अधिकारी की इतनी हिम्मत नहीं होती थी कि वह उन्हें डराए, धमकाए या हटाने की बात करे।
क्योंकि सब जानते थे—
यह जय सिंह भैया का शहर है, यहां गरीब की बेइज्जती नहीं होगी।
ठेले–गुमटी लगाने वाले लोग सीना ठोककर धंधा करते थे। उनके चेहरे पर डर नहीं, आत्मसम्मान होता था। वे अफसरों से आंख चुराकर नहीं चलते थे, बल्कि भरोसे के साथ सिर उठाकर जीते थे।
क्योंकि सत्ता उनके खिलाफ नहीं, उनके साथ खड़ी थी।
कई लोग आज भी कहते हैं—
“तब हम गरीब नहीं लगते थे।”
“तब सरकार दूर नहीं, घर की तरह लगती थी।”
आज जब झोपड़ियों के टूटने से पहले आवाज़ नहीं, डर आता है—
आज जब रोज़ी पर पहले वार होता है—
तब जय सिंह भैया का वह दौर और भी कीमती लगने लगता है।
वह समय यह सिखाता है कि
सत्ता अगर संवेदनशील हो, तो कानून लाठी नहीं बनता, ढाल बन जाता है।
और जब नेतृत्व इंसान हो,
तो न झोपड़ी टूटती है, न भरोसा—बल्कि उम्मीद ज़िंदा रहती है

Share.

About Us

हमारी यह समाचार पोर्टल वेबसाइट नवीनतम ख़बरों, विस्तृत विश्लेषण और सामयिक घटनाओं की सटीक जानकारी प्रदान करती है। कन्हैया सोनी द्वारा स्थापित और संपादित, हम निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचारों के प्रति समर्पित हैं।

Contact Us

👤 Editor: कन्हैया सोनी

📞 Contact No.: +91 89596 82168
📧 Email ID: kaniyason2521@gmail.com

© 2025 Soni Narad Muni News. All Rights Reserved. Developed by Nimble Technology

Exit mobile version