समय बड़ा बलवान ,,,,,

( प्रेरणादायक कथा )

“तुलसी नर का क्या बड़ा, समय बड़ा बलवान।

भीलां लूटी गोपियाँ, वही अर्जुन वही बाण॥”

तुलसीदास जी

– महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया था. कंस के ससुर व मित्र, मगध के नरेश जरासंध के वध के बाद मथुरा सुरक्षित लग रही थी. मगर मथुरा नगरी पर काल यमन ने हमला कर दिया. मथुरा फिर खतरे में थी. काल यमन (जिसके कारण ही कृष्ण को मथुरा छोड़नी पड़ी और वे रणछोड़ कहलाये.) को अमर रहने का वरदान मिला हुआ होने के कारण कृष्ण, बलराम भी उसे मार नहीं सकते थे. इसलिए वो बार बार बड़ी सेना लेके आक्रमण करता था. एक बार कृष्ण युद्ध में घायल हो गए. इसलिए अर्जुन उनसे मिलने आ रहे थे तब अर्जुन को रास्ते में नारद मुनि मिले और उन्होंने कहा कि, “अर्जुन कृष्ण से मिलने जा रहे हो पर उनके घावों को छूना मत. छुओगे तो तुम्हारी शक्ति क्षीण हो जाएगी.”

अर्जुन दुविधा में कृष्ण के पास पहुंचा, कृष्ण ने अर्जुन को अपने सिरहाने बैठने को बोला पर अर्जुन हिचकिचा रहा था. भगवान ने अर्जुन का संशय समझ लिया और सीधे अर्जुन से कहा कि, “कोई बात नहीं अर्जुन तुम मेरे घाव हाथ हाथ से मत छूना पर तुम्हानी कमान से तो इसे छू कर देख ही सकते हो.” अर्जुन को बात समझ में आ गई और उसने कृष्ण के घाव देखने के लिए अपनी कमान का इस्तेमाल किया और जायजा लिया. अर्जुन ने गुस्से में युद्ध में उतरने की इच्छा जाहिर की तो कृष्ण ने मना कर दिया, और बताया की कैसे वरदान प्राप्त काल यमन उसके लिए खतरा हो सकता है.

कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि, “मैं घायल हूँ और मुझसे मिलने के लिए गोपियाँ आ रही है, रास्ते में भीलों के कबीले पड़ते हैं, तुम इतना करना की उनसे गोपियों की रक्षा करना.” अर्जुन ने हाँ बोला और दहाड़ा. उसे अपने बल पर घमंड हो चुका था. जब अगले दिन गोपियाँ कृष्ण से मिलने आई तो भील लुटेरों ने उन्हें लूटने के लिए घेर लिया. अर्जुन तैनात था पर उसके लाख चाहने पर भी वो उनका कुछ ना बिगाड़ सका.

कमान घावों पर लगाने से वो मन्त्र भूल गया और निशक्त हो गया, लुटेरों ने गोपियों को लूट लिया. अर्जुन शर्मिंदा था, कृष्ण से नजर मिलाने की उसकी हिम्मत नहीं हुई. उसे भी समझ में आ गया की महाभारत के युद्ध में ताकत मेरी नहीं समय की थी.

इसी घटना से तुलसीदास जी ने समय की महता को बहुत ही सुन्दर दोहे से बताते हुए कहा :

तुलसी नर का क्या बड़ा, समय बड़ा बलवान।

भीलां लूटी गोपियाँ, वही अर्जुन वही बाण॥

अर्थात समय ही व्यक्ति को सर्वश्रेष्ठ और कमजोर बनता है. अर्जुन का वक्त बदला तो उसी के सामने भीलों ने गोपियों को लूट लिया जिसके गांडीव की टंकार से बड़े बड़े योद्धा घबरा जाते थे.

विशेष ,,,,, सत्ता बल, धन बल, भौतिक बल ये सब आपके अंदर अहंकार के कोष को जन्म दे सकते है ! अतः अपने बलों पर अहंकार ना करे क्योंकि तुलसीदास जी ने समय को बलवान कहा है ना की उपरोक्त बलों को !

 

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