कोरबा में सोमवार रात माणिकपुर चौकी क्षेत्र के साहू समाज भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुई एक मामूली घटना ने मंत्री लखन लाल देवांगन की संवेदनशील कार्यशैली को उजागर कर दिया। काफिले की एक गाड़ी पर पत्थर गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार नाबालिगों को पूछताछ के लिए चौकी बुलाया।
जांच में सामने आया कि यह कोई पथराव या साजिश नहीं थी, बल्कि बच्चे खेल-खेल में पत्थर उछाल रहे थे और अनजाने में यह घटना हो गई। जैसे ही मामला मंत्री तक पहुंचा, उन्होंने तुरंत मानवीय पहल दिखाते हुए खुद चौकी में फोन किया।
मंत्री ने साफ कहा कि “यह बच्चों के भविष्य का सवाल है, गलती अनजाने में हुई है, इसलिए उन्हें समझाइश देकर छोड़ दिया जाए।” उनके इस निर्देश के बाद पुलिस ने सभी नाबालिगों को चेतावनी देकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया।
👉 इस फैसले ने न केवल बच्चों को कानूनी झंझट से बचाया, बल्कि उनके भविष्य पर पड़ने वाले दाग को भी मिटा दिया।
👉 स्थानीय लोगों ने मंत्री की इस पहल की जमकर सराहना की और कहा कि ऐसे नेता ही समाज में भरोसा पैदा करते हैं, जो सख्ती के बजाय संवेदनशीलता और समझदारी से फैसले लेते हैं।
👉 पुलिस ने भी स्पष्ट किया कि मामले में किसी प्रकार की साजिश या सुरक्षा चूक नहीं थी, यह पूरी तरह एक आकस्मिक घटना थी।
👉 “नेता वही, जो कानून के साथ इंसानियत भी निभाए — लखन लाल देवांगन ने फिर साबित किया।”




