Q1. छत्तीसगढ़ की राज्यसभा सीटें अचानक चर्चा में क्यों हैं?
क्योंकि अप्रैल में देशभर की 72 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें छत्तीसगढ़ की 2 अहम सीटें भी शामिल हैं। इन सीटों पर अभी फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी हैं, जिनका कार्यकाल 9 अप्रैल को पूरा हो रहा है। चुनाव कार्यक्रम मार्च के दूसरे सप्ताह तक आना तय है।
Q2. आंकड़ों की लड़ाई में किसका पलड़ा भारी है?
एक राज्यसभा सीट के लिए 31 विधायकों की जरूरत है।
कांग्रेस के पास सिर्फ एक सीट जीतने की ताकत है।
भाजपा के पास 54 विधायक हैं, यानी एक सीट आराम से निकल सकती है, लेकिन दो नहीं।
यानी मुकाबला सीधा है, लेकिन राजनीति सीधी नहीं।
Q3. क्या भाजपा जोड़–तोड़ का रास्ता अपनाएगी?
संभावना बेहद कम।
छत्तीसगढ़ में राजनीतिक टूट का इतिहास नहीं है और भाजपा को कम से कम 8 कांग्रेस विधायक तोड़ने होंगे, जो ज़मीनी हकीकत में लगभग नामुमकिन है।
Q4. क्या इस बार ‘बाहरी बनाम स्थानीय’ का मुद्दा उठेगा?
2022 में कांग्रेस ने बाहरी चेहरों को भेजकर खुद यह मुद्दा भाजपा को दे दिया था।
इसलिए अब भाजपा पहले पहल नहीं करेगी, लेकिन अगर कांग्रेस ने फिर बाहरी कार्ड खेला, तो भाजपा भी पीछे नहीं हटेगी।
Q5. भाजपा का संभावित फॉर्मूला क्या हो सकता है?
भाजपा इस बार संतुलन साधने की कोशिश में दिखेगी—
क्षेत्र: मध्य या दक्षिण छत्तीसगढ़
वर्ग: दलित, ओबीसी या सामान्य
एज + विज़न 2047
यूजीसी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को ध्यान में रखकर ब्राह्मण या महिला चेहरा
Q6. भाजपा के सबसे मजबूत नाम कौन से हैं?
नितिन नबीन – बाहरी विकल्प, लेकिन भाजपा बाहरी की तोहमत से बचना चाहेगी
ओपी चौधरी – आईएएस बैकग्राउंड, नीति और विज़न 2047 से जुड़ाव
लक्ष्मी वर्मा – ओबीसी संतुलन का मजबूत दांव
सरोज पांडेय – महिला, ब्राह्मण, निर्विवाद और यूजीसी विवाद को साधने वाला चेहरा
Q7. कांग्रेस किस चेहरे पर दांव लगा सकती है?
कांग्रेस में अंतिम फैसला गांधी परिवार के हाथ में होता है, इसलिए कयास कठिन हैं।
फिर भी संभावित नाम—
ताम्रध्वज साहू – ओबीसी समीकरण
टीएस सिंहदेव – सामान्य वर्ग, राष्ट्रीय पहचान
मोहम्मद अकबर – मुस्लिम फैक्टर और संगठनात्मक अनुभव
कांग्रेस किसी मौजूदा विधायक को राज्यसभा नहीं भेजेगी, यह लगभग तय है।
निष्कर्ष | नटशेल
छत्तीसगढ़ की राज्यसभा की लड़ाई संख्या से ज्यादा रणनीति की है।
भाजपा: सरोज पांडेय या लक्ष्मी वर्मा जैसे संतुलित चेहरे
कांग्रेस: ताम्रध्वज साहू या टीएस सिंहदेव जैसे भरोसेमंद नाम
अब सवाल सिर्फ इतना है—
दिल्ली की कुर्सी तक पहुंचने वाला नाम कौन-सा होगा, और आख़िरी दांव कौन खेलेगा?


