कोरबा। नगर निगम कोरबा में भुगतान व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। नगर निगम कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन जिला-कोरबा ने आयुक्त को पत्र लिखकर वित्तीय वर्ष 2024–25 की पार्षद निधि के करोड़ों रुपये लंबित होने का गंभीर आरोप लगाया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष असलम खान के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा 9 दिसंबर 2024 को पार्षद निधि की लगभग 201 लाख रुपये की राशि निगम को जारी की गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस राशि में से केवल 32 ठेकेदारों को भुगतान किया गया, जबकि 37 ठेकेदार आज तक अपने हक की राशि के इंतजार में हैं।
इतना ही नहीं, पार्षद निधि की दूसरी किश्त यानी लगभग 201 लाख रुपये अब तक निगम को प्राप्त नहीं हुई है। कुल मिलाकर 400 लाख रुपये से अधिक की राशि अटकी होने का दावा किया जा रहा है। सवाल उठता है कि जब पहली किश्त की राशि मिल चुकी थी तो फिर दर्जनों फाइलें चेक सेक्शन में क्यों धूल खा रही हैं?
ठेकेदारों का आरोप है कि भुगतान की फाइलें जानबूझकर रोकी जा रही हैं। करीब 30 दिन पहले अधिकारियों से मुलाकात कर भुगतान का आग्रह किया गया था। 21 जनवरी 2026 को उपयोगिता प्रमाण पत्र भी भेज दिया गया, इसके बावजूद निगम के खाते में राशि नहीं आई और भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
निर्माण कार्य पूरा कर चुके ठेकेदार अब मजदूरों और सामग्री सप्लायर्स को अपनी जेब से भुगतान करने को मजबूर हैं। लगातार देरी से कई ठेकेदार आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
एसोसिएशन ने लेखा विभाग और निर्माण शाखा के अधिकारियों के रवैये पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बार-बार अवगत कराने के बावजूद प्रशासनिक उदासीनता बनी हुई है।
ठेकेदार संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह नगर निगम प्रशासन की होगी।
यह मामला केवल ठेकेदारों का नहीं, बल्कि शहर के विकास की रफ्तार का भी है। यदि काम कराने वालों को ही समय पर भुगतान नहीं मिलेगा, तो विकास कार्य कैसे आगे बढ़ेंगे? अब निगाहें आयुक्त के फैसले पर टिकी हैं — क्या निगम पारदर्शिता दिखाएगा या फिर फाइलों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?



