कोरबा, 02 जुलाई। वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने जिले में अवैध बालू उत्खनन एवं परिवहन की लगातार सामने आ रही शिकायतों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधि का शासन (Rule of Law) तभी सार्थक माना जाता है, जब कानून का पालन एवं उसका प्रवर्तन बिना किसी भेदभाव के सभी व्यक्तियों पर समान रूप से किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि यातायात नियमों के उल्लंघन पर आम नागरिकों के विरुद्ध तत्काल चालानी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाती है, तो बिना नंबर प्लेट अथवा अन्य वैधानिक नियमों की अनदेखी करते हुए कथित रूप से अवैध बालू परिवहन में संलग्न ट्रैक्टरों एवं अन्य वाहनों के विरुद्ध भी समान कठोरता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई होना आवश्यक है। कानून के अनुपालन में किसी प्रकार का भेदभाव या चयनात्मक दृष्टिकोण न्याय के मूल सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
धनेश कुमार सिंह ने कहा कि यदि अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई के स्थान पर केवल आम नागरिकों के विरुद्ध ही कठोरता दिखाई देती है, जबकि संगठित अवैध कारोबार करने वालों के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती, तो इससे प्रशासन की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठते हैं। ऐसी स्थिति जनसामान्य के कानून एवं प्रशासन पर विश्वास को भी प्रभावित करती है।
उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं खनिज विभाग से आग्रह किया कि अवैध बालू उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध संयुक्त अभियान चलाकर दोषियों के विरुद्ध विधि के अनुरूप कठोर एवं निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कानून का पालन प्रत्येक व्यक्ति पर समान रूप से लागू हो, चाहे उसका सामाजिक, आर्थिक अथवा राजनीतिक प्रभाव कुछ भी हो।
उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता तथा विधि के समान संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है। इसलिए प्रशासन का दायित्व है कि वह निष्पक्ष, पारदर्शी और समान रूप से कानून का क्रियान्वयन कर जनता के न्याय व्यवस्था एवं विधि के शासन पर विश्वास को और अधिक सुदृढ़ बनाए। चयनात्मक कार्रवाई किसी भी स्थिति में लोकतांत्रिक मूल्यों एवं संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।


