बिलासपुर। युवा कांग्रेस के संगठनात्मक चुनाव को लेकर बिलासपुर जिले में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी सरगर्मियों के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। ग्रामीण जिलाध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री का गुट जिलाध्यक्ष पद की दौड़ से पीछे हट गया है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, दो दिन पहले भिलाई विधायक देवेंद्र यादव से हुई मुलाकात के बाद गंगोत्री समर्थित पैनल ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि गुट की ओर से जिलाध्यक्ष पद के लिए कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा जाएगा।
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह, जिन्हें महेंद्र गंगोत्री का करीबी माना जाता है, संभावित दावेदारों में शामिल थे। हालांकि, उन्होंने भी चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही गंगोत्री गुट के अन्य संभावित उम्मीदवारों ने भी अपनी दावेदारी वापस ले ली है।
अब जिलाध्यक्ष पद का मुकाबला शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी समर्थित उम्मीदवारों के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है। तीनों गुट अपने-अपने समर्थकों को संगठित करने में जुट गए हैं और चुनाव को लेकर जोरदार तैयारी कर रहे हैं।
चुनाव खर्च बना बड़ी चुनौती
इस बार युवा कांग्रेस चुनाव में आर्थिक पहलू भी कई दावेदारों के लिए चुनौती बन गया है। पार्टी के नियमों के अनुसार प्रत्येक वोट पर 75 रुपये का अंशदान देना होगा। ऐसे में 5 हजार वोट पर करीब 3.75 लाख और 10 हजार वोट पर लगभग 7.50 लाख रुपये का खर्च आ रहा है।
इसी वजह से कई युवा नेताओं ने आर्थिक कारणों से चुनाव लड़ने का विचार छोड़ दिया है। वहीं, संगठन ने नामांकन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 5 जुलाई कर दी है, जिसके बाद चुनावी गतिविधियां और तेज हो गई हैं।


