छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत ने रविवार को एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। सदन की कार्यवाही राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और राजकीय गीत ‘अरपा पैरी के धार’ के बिना शुरू हुई, जिस पर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने इसे छत्तीसगढ़ की गौरवशाली संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ बताते हुए राज्य की अस्मिता और राजकीय मर्यादा का सीधा अपमान करार दिया है।
अमित जोगी ने कहा कि विधानसभा, जो लोकतंत्र और जनता की आस्था का सर्वोच्च मंच है, वहां राष्ट्रगान और राज्यगीत की अनदेखी कोई छोटी चूक नहीं, बल्कि एक गंभीर संवैधानिक चूक है। उन्होंने याद दिलाया कि 1 नवंबर 2000 को नवगठित छत्तीसगढ़ की पहली विधानसभा की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई थी और तब से यह एक स्थापित परंपरा रही है, जिसे शीतकालीन सत्र में तोड़ दिया गया।
उन्होंने कहा कि ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है और ‘अरपा पैरी के धार’ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा। इन दोनों की उपेक्षा राज्य की पहचान और संवैधानिक मूल्यों के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाती है। अमित जोगी ने इसे विधानसभा भवन से स्वर्गीय मिनीमाता जी का नाम हटाए जाने से जोड़ते हुए कहा कि यह राज्य की भावनाओं पर दूसरा प्रहार है।
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने इस पूरे मामले में तत्काल स्पष्टीकरण और बिना शर्त माफी की मांग की है। साथ ही पार्टी ने मांग की है कि विधानसभा में राष्ट्रगान और राज्यगीत की परंपरा को तुरंत बहाल किया जाए और राज्य निर्माताओं व महापुरुषों के सम्मान को सुनिश्चित किया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ का स्वाभिमान और लोकतांत्रिक गरिमा सुरक्षित रह सके।


