कोरबा। एक ओर कोरबा शहर के अधिकांश मोहल्ले और गलियां आज भी अंधेरे में डूबी हुई हैं—कहीं महीनों से स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हैं तो कहीं अब तक लग ही नहीं पाई हैं। दूसरी ओर नगर पालिक निगम द्वारा सड़कों पर सजावटी LED रोप लाइट लगाने का कार्य धड़ल्ले से कराया जा रहा है, जिस पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि नगर निगम की निविदा सूचना के अनुसार LED रोप लाइट कार्य की अंतिम तिथि 30 जनवरी 2026 है और उसी दिन टेंडर खोला जाना है। इसके बावजूद शहर के कई इलाकों में विद्युत पोलों पर LED रोप लाइट पहले ही चमकती नजर आ रही हैं, जिससे यह साफ होता है कि कार्य जमीन पर शुरू हो चुका है।
नियमों के अनुसार टेंडर खुलने और विधिवत कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) जारी होने से पहले किसी भी प्रकार का कार्य कराना वित्तीय नियमों का उल्लंघन माना जाता है। इसके अलावा जानकारी सामने आई है कि इस कार्य में नगर निगम की गाड़ियों और संसाधनों का भी उपयोग किया जा रहा है, जो केवल स्वीकृत कार्यों के लिए ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
दस्तावेजों में LED रोप लाइट कार्य को दो भागों में दिखाया गया है—एक की लागत 9 लाख 90 हजार रुपये और दूसरे की 9 लाख 62 हजार रुपये। जबकि शासन के निर्देशों के अनुसार 10 लाख रुपये से अधिक के कार्य ऑनलाइन टेंडर से कराए जाने चाहिए। ऐसे में एक ही प्रकृति के कार्य को दो हिस्सों में बांटना टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
इस पूरे मामले में जब संबंधित अधिकारी मसीह से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, “यह निगम का फंड है, उसी से लाइट लगाई जा रही है।”
जब उनसे पूछा गया कि टेंडर तो 30 जनवरी को खुलना है, उससे पहले काम कैसे शुरू हो गया?—तो अधिकारी अचानक चुप हो गए और बोले, “अभी गाड़ी चला रहा हूं, बाद में बात करता हूं।” इसके बाद संपर्क नहीं हो सका।
गौरतलब है कि इससे पहले भी शहर में LED रोप लाइट का कार्य कराया गया था, जो गारंटी अवधि में ही खराब हो गया, लेकिन न तो गुणवत्ता पर सवाल उठे और न ही कोई ठोस कार्रवाई हुई। ऐसे में एक बार फिर उसी तरह के कार्य को प्राथमिकता देना संदेह पैदा करता है।
अब शहर में सवाल गूंज रहा है—जब मोहल्लों में अंधेरा पसरा है, तो पहले सजावट क्यों? और टेंडर से पहले काम शुरू होने की इजाजत किसने दी?


