भारतीय जनता पार्टी में इन दिनों नियुक्तियों की बारिश हो रही है। मोर्चा हो या प्रकोष्ठ—महिला मोर्चा, युवा मोर्चा, अनुसूचित जाति मोर्चा, अल्पसंख्यक मोर्चा—हर तरफ पदों की सौगात बंट रही है। इसी क्रम में बुनकर प्रकोष्ठ के प्रदेश सहसंयोजक पद पर नरेंद्र देवांगन के नाम पर मुहर लगी और यहीं से शुरू हो गया नाम का महासंग्राम।
नाम सामने आते ही कोरबा में समर्थकों में खुशी की ऐसी लहर दौड़ी कि बधाइयों की बाढ़ आ गई। सोशल मीडिया से लेकर गली-मोहल्लों तक मिठाइयाँ बंटने लगीं, बैनर-फ्लेक्स ऐसे लगे मानो चुनाव जीत लिया गया हो। लेकिन ट्विस्ट तब आया जब जिला संगठन भी साफ नहीं कर पाया कि आखिर यह नरेंद्र देवांगन हैं कौन?
दरअसल, खेल नाम का था। जिन्हें पद मिला वे रायपुर निवासी नरेंद्र देवांगन निकले, और बधाइयाँ मिलती रहीं कोरबा वाले नरेंद्र देवांगन को। दो दिसंबर को सूची जारी होने के बाद कई दिन तक यह भ्रम चलता रहा। आखिरकार जब प्रदेश संगठन ने स्थिति साफ की, तब जाकर कोरबा में लगे बैनर-फ्लेक्स उतरे और मिठाइयों की सप्लाई बंद हुई। संभवतः यह पहला मामला होगा जब बिना पद मिले ही बधाइयाँ और मिठाइयाँ बंट गईं।
उधर, नियुक्तियों के साथ असंतोष भी पैक होकर आया। जिन्हें पद मिला वे खुश, और जो उम्मीद लगाए बैठे थे वे मायूस। चर्चा यह भी है कि कुछ ऐसे चेहरे भी पद पा गए जिन्होंने चुनाव के समय भीतरघात किया था, जबकि कई समर्पित कार्यकर्ता आज भी सूची से बाहर हैं। हालांकि संगठन का कहना है—“इतने बड़े परिवार में थोड़ी बहुत खटपट तो चलती ही है।”
इसी बीच अजा मोर्चा की सूची में एक नाम ऐसा उभरा जिसने सबका ध्यान खींच लिया—“श्री मिस्टर इंडिया”। सोशल मीडिया प्रभारी के तौर पर यह नाम देख पार्टी कार्यकर्ता खुद पूछ रहे हैं कि यह सच में नाम है या फिर सोशल मीडिया की गलती।
वहीं, रायपुर निवासी नरेंद्र देवांगन ने नियुक्ति की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें वरिष्ठ नेता पवन साय के निर्देश मिले हैं और वे पूरी ईमानदारी से संगठन के लिए कार्य करेंगे।
कुल मिलाकर, भाजपा की इस नियुक्ति सूची ने एक बात तो साबित कर दी—
पद भले एक को मिले, लेकिन अगर नाम से मिल जाए तो जश्न दो जगह होता है! 😄


