छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों संगठनात्मक बदलावों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की महत्वपूर्ण बैठक के बाद पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी को लेकर राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि नई टीम में छत्तीसगढ़ को भी महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व मिल सकता है, हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष की मौजूदगी में हुई बैठक में संगठनात्मक ढांचे पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके बाद नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
उपमुख्यमंत्रियों के नाम चर्चा में
राजनीतिक चर्चाओं में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अरुण साव के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ के किसी वरिष्ठ नेता को महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि इस संबंध में पार्टी ने कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
महिला और युवा नेतृत्व को मिल सकता है अवसर
सियासी हलकों में यह भी चर्चा है कि राज्यसभा सदस्य लक्ष्मी वर्मा, सांसद संतोष पांडेय, रूपकुमारी चौधरी तथा विधायक गोमती साय जैसे नेताओं को भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थान मिल सकता है। साथ ही किसी युवा चेहरे को राष्ट्रीय सह-मीडिया प्रभारी जैसी जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
मंत्रिमंडल विस्तार की भी अटकलें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राष्ट्रीय संगठन में बड़ा बदलाव होता है तो उसका असर छत्तीसगढ़ की राजनीति पर भी पड़ सकता है। इसी के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मंत्रिमंडल में फेरबदल या विस्तार को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि इस संबंध में भी अभी तक कोई आधिकारिक संकेत सामने नहीं आया है।
छत्तीसगढ़ की रही है मजबूत भागीदारी
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व पहले भी प्रभावशाली रहा है। पूर्व में सरोज पांडेय, रामविचार नेताम और करुणा शुक्ला जैसे नेताओं ने राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वर्तमान में भी प्रदेश के कई नेता राष्ट्रीय संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
चूंकि नितिन नवीन लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी रहे हैं, इसलिए उन्हें प्रदेश के संगठनात्मक और राजनीतिक समीकरणों की अच्छी जानकारी है। ऐसे में नई राष्ट्रीय टीम के गठन के बाद छत्तीसगढ़ को लेकर पार्टी के फैसलों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
अब सबकी निगाहें भाजपा की आधिकारिक घोषणा पर हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि राष्ट्रीय संगठन में छत्तीसगढ़ को कितनी और कैसी जिम्मेदारियां मिलती हैं।


