शारदा चौक से तात्यापारा तक करीब सात सौ मीटर की रोड चौड़ीकरण काे लेकर पिछले करीब 19 साल से चल रही राजनीति अब और तेज हो गई है। रोड चौड़ीकरण का प्लान जब बना तब राज्य में 15 साल भाजपा की सरकार रही। एक बार कांग्रेस की सरकार रही। भाजपा शासनकाल में निगम में लगातार कांग्रेसी महापौर रहे। इस वजह से चौड़ीकरण निगम और राज्य सरकार की राजनीति में उलझा रहा।

कांग्रेस सरकार में निगम में भी कांग्रेस के महापौर रहे। उम्मीद जागी कि चौड़ीकरण होगा। सरकार ने पीडब्ल्यूडी को एजेंसी बनाकर चौड़ीकरण के लिए 137 करोड़ की स्वीकृति दी। भूमिपूजन भी हुआ लेकिन सरकार बदलते ही प्रक्रिया अटक गई। फिर राजनीति हो रही है। भास्कर ने इस मुद्दे पर पहली बार प्रभावित व्यापारियों, महापौर एजाज ढेबर और नेता-प्रतिपक्ष मीनल चौबे को एक मंच पर लाया। उनके सामने व्यापारियों ने कहा कि उन्हें राजनीति से मतलब नहीं। मुआवजा दें और चौड़ीकरण शुरू करें।

  • बद्रीनारायण भूतड़ा: आज की गाइडलाइन रेट पर मुआवजा दें। तोड़फोड़ और व्यवस्था होने में करीब एक साल लगेंगे। व्यापार प्रभावित होगा इसलिए सभी क्षतिपूर्ति चाहते हैं।
  • भूपेंद्र शर्मा: हम सभी करीब 100 साल से काबिज हैं। अधिनियम के अनुसार मुआवजा देकर चौड़ीकरण किया जा सकता है।
  • आदितेंद्र शुक्ला: नगर निगम व पीडब्ल्यूडी, दोनों देश के कानून के भीतर आते हैं। दोनों के लिए नियम अलग-अलग नहीं हो सकते।
  • विजय गिदवानी: 2008 से नोटिस आ रहा है। दो से तीन बार बैठकें हो चुकी है। कई ऑप्शन दिए गए। व्यापारियों की सहमति भी है।
  • संजय अग्रवाल: हमे दोगुना मुआवजा चाहिए। चौड़ीकरण के बारे में पेपर में ही पढ़ रहे हैं। धरातल पर काम शुरू नहीं हुआ है।
  • वीरेंद्र गुप्ता: व्यापार बुरी तरह प्रभावित है। 19 साल से इंतजार कर रहे हैं। आम लोगों से जुड़ा मसला हैं राजनीति नहीं होनी चाहिए।
  • गजेंद्र वर्मा: चौड़ीकरण में जो भी तकनीकी त्रुटियां आ रही हैं, उन्हें जल्द से जल्द दूर करना चाहिए।
  • तैय्यब खान: जाम की वजह से ग्राहकों को दुकान में घुसने का रास्ता नहीं मिलता। हम 60 फीसदी नुकसान खाकर बैठे हैं। इस समस्या का हल होना बहुत जरूरी है।
  • अक्षय नाहर: इस सड़क में हम लोग एक तरह से कैद हो गए हैं। हमारी समस्या पर केवल राजनीति हो रही है।
  • कृष्णा साहू: दुकानदारी चौपट हो चुकी है। रोजाना दुकान के सामने लोग गाड़ी लगा देते हैं।
  • शिवहरी केसरकर: कई महापौर, सांसद और विधायकों ने मुद्दा उठाया लेकिन सब ठंडे बस्ते में चला गया।
  • संदीप शुक्ला : हर व्यापारी आज व्यापार से वंचित हो रहा है। इस मामले को भाजपा-कांग्रेस से अलग हटकर सोचना होगा।
  • अनुज दुबे : सड़क से जुलूस, शोभायात्रा निकलने पर दो-तीन घंटे के लिए पूरी रोड जाम हो जाती है।
  • अनूप दुबे : यह समस्या मुआवजे के लिए अटकी है। जिम्मेदारों को देखना चाहिए की दिक्कत कहां आ रही है।
  • राधेश्याम विभार: यह अच्छी पहल है कि आज सभी लोग एक मंच पर बैठकर इस मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। निश्चित तौर पर इसका हल निकलेगा और जल्द ही चौड़ीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी।

मंत्री साव ही बदल सकते हैं एजेंसी

चर्चा के दौरान यह निकलकर आया कि चौड़ीकरण के लिए लोक निर्माण विभाग की जगह गम रायपुर को एजेंसी बनाया जाए। एजेंसी बदलने का अधिकार मंत्री को है। लोक निर्माण और नगरीय प्रशासन दोनों विभाग के मंत्री अरुण साव हैं। वे उपमुख्यमंत्री भी हैं। इसलिए एजेंसी बदलने में विशेष दिक्कत भी नहीं होगी। मंत्री साव से मिलकर इसकी मांग करनी होगी। महापौर एजाज ढेबर ने सुझाव दिया कि नेता प्रतिपक्ष चाहें तो उनके नेतृत्व में वे खुद और सभी व्यापारी मंत्री साव के पास इसका निवेदन कर सकते हैं। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उनकी सरकार ने ही आमापारा से तात्यापारा तक चौड़ीकरण किया है और हम अब भी यह करने के लिए तैयार हैं।

एजेंसी बदलनी होगी, तभी मिलेगा मुआवजा

महापौर एजाज ढेबर ने कहा कि चौड़ीकरण का पेंच पीडब्ल्यूडी को लेकर फंसा है। पीडब्ल्यूडी प्रभावितों को दोगुना मुआवजा नहीं दे सकती। कानूनन आबादी क्षेत्र में दोगुने मुआवजे का प्रावधान है, जो नगरीय प्रशासन विभाग दे सकता है। एजेंसी बदलने पर प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

एजेंसी किसने तय की, क्यों नहीं बदली

नेता प्रतिपक्ष मीनल चौबे ने कहा कि चौड़ीकरण के लिए पीडब्ल्यूडी को पूर्व कांग्रेस सरकार ने एजेंसी बनाया था। क्या तकनीकी दिक्कत की जानकारी नहीं थी। उस समय प्रयास क्यों नहीं किया। कांग्रेस ने आखिरी दिनों में चौड़ीकरण की प्रशासकीय स्वीकृति दी।

दो वार्ड की सीमा बनाती है रोड

तात्यापारा की तरह नहरपारा रोड का मामला मुआवजे के कारण करीब एक दशक से लंबित था। तात्यापारा के व्यापारियों को विश्वास में लेकर प्रयास किया जाए तो चौड़ीकरण का रास्ता खुलेगा।
सुरेश चन्नावार, पार्षद, इंदिरा गांधी वार्ड

पूर्व सरकार के साढ़े चार साल के दौरान चौड़ीकरण को लेकर एक बार भी न तो महापौर ने मुझे बुलाया और ना ही चर्चा की। चौड़ीकरण ना केवल प्रभावित लोगों के लिए बल्कि यहां से गुजरने वालों के लिए भी।
सीमा कंदोई, पार्षद,सदर बाजार

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