छत्तीसगढ़ की दो राज्यसभा सीटों पर अप्रैल 2026 में होने वाले चुनाव ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। 16 मार्च को मतदान होना है और उससे पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने गणित साधने में जुट गए हैं।
🔴 कांग्रेस का सीधा संदेश: “बाहरी नहीं, इस बार स्थानीय चेहरा”
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने साफ कर दिया है कि इस बार कांग्रेस छत्तीसगढ़ से किसी वरिष्ठ स्थानीय नेता को ही राज्यसभा भेजेगी। उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि “हम पैनल बनाकर औपचारिकता पूरी नहीं करते, जैसा भाजपा कर रही है। कांग्रेस में सर्वानुमति से चर्चा के बाद फैसला होता है।”
महंत ने यह भी याद दिलाया कि पिछली बार सत्ता में रहते हुए कांग्रेस ने बाहरी चेहरों को मौका दिया था, लेकिन अब विपक्ष में रहते हुए पार्टी ऐसे नेता को आगे करेगी जो राज्य के मुद्दों को मजबूती से संसद में उठा सके।
🟢 बघेल का संकेत: फैसला प्रदेश नेतृत्व के हाथ, मुहर हाईकमान की
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्यसभा जाने के सवाल पर गेंद संगठन के पाले में डाल दी। उन्होंने कहा,
“यह निर्णय पीसीसी चीफ और सीएलपी लीडर तय करेंगे। वही पैनल बनाएंगे, चर्चा करेंगे और अंततः हाईकमान अंतिम फैसला करेगा।”
बघेल के बयान से साफ है कि कांग्रेस इस बार प्रक्रिया के जरिए नाम तय करना चाहती है, ताकि किसी तरह की अंदरूनी नाराजगी न हो।
⚖️ चुनौती बड़ी, गणित कठिन
कांग्रेस फिलहाल सत्ता में नहीं है, इसलिए संख्या बल का समीकरण उसके पक्ष में नहीं है। ऐसे में रणनीति और सहमति दोनों ही अहम होंगे। “मैं पहले से विधायक हूं, दूसरों को मौका मिले” जैसी लाइनें भी पार्टी के भीतर नए चेहरों की दावेदारी का संकेत दे रही हैं।
अब नजर इस बात पर है कि क्या कांग्रेस सच में ‘स्थानीय और वरिष्ठ’ फार्मूले पर अडिग रहती है या अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण तस्वीर बदल देंगे।
राज्यसभा की इस जंग में बयानबाजी तेज है, लेकिन असली फैसला 16 मार्च को होगा — और उससे पहले सियासी शतरंज की कई चालें अभी बाकी हैं।


