फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के सहारे नामांतरण का आरोप, जमीन 12 टुकड़ों में बेचने का मामला; तहसीलदार ने दोषियों पर FIR की बात कही

बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने के लिए कथित तौर पर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के जरिए नामांतरण कराने का गंभीर मामला सामने आया है। राजस्व विभाग की जांच में ऐसे दस्तावेज सामने आए हैं, जिनकी नगर निगम के मूल रजिस्टर से जांच कराने पर कई विसंगतियां उजागर हुईं। जिस व्यक्ति को मृत बताकर जमीन का नामांतरण कराया गया, उसके मृत्यु प्रमाण पत्र के पंजीयन क्रमांक पर नगर निगम के मूल रजिस्टर में उस व्यक्ति का नाम ही नहीं, बल्कि ‘लावारिस’ दर्ज मिला।

मामला मौजा चांटीडीह, पटवारी हल्का नंबर 33 स्थित खसरा नंबर 489 से जुड़ा है। कुल 0.121 हेक्टेयर रकबे में से 0.008 हेक्टेयर जमीन की बिक्री के बाद नामांतरण के लिए आवेदन किया गया था। यह जमीन राजकुमार केंवट के खाते से मुख्तियार आम किशन कश्यप के माध्यम से मोहम्मद शाहजाद अली को बेचे जाने का उल्लेख है।

पुराने राजस्व रिकॉर्ड में सामने आई गड़बड़ी

नामांतरण प्रकरण की सुनवाई के दौरान पुराने राजस्व अभिलेखों की जांच की गई। वर्ष 2011-12 के नामांतरण पंजी में महाजन और उनके पुत्र रामप्रसाद की मृत्यु एक साथ दर्शाकर जमीन राजकुमार के नाम दर्ज किए जाने की बात सामने आई। खास बात यह रही कि इस नामांतरण में वैध वंशावली का स्पष्ट उल्लेख नहीं था।

दस्तावेजों की सत्यता पर संदेह होने के बाद विक्रेता पक्ष की ओर से प्रस्तुत मृत्यु प्रमाण पत्रों की जांच के लिए नगर निगम से जानकारी मांगी गई।

निगम के मूल रजिस्टर ने खोली पोल

नगर निगम से प्राप्त रिपोर्ट ने पूरे मामले में नया मोड़ ला दिया। वर्ष 1990 के जिस पंजीयन क्रमांक के आधार पर महाजन का मृत्यु प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया था, उसी क्रमांक के मूल रजिस्टर में महाजन के बजाय ‘लावारिस’ का उल्लेख मिला।

इसी तरह वर्ष 2003 के मृत्यु प्रमाण पत्र में रामप्रसाद का नाम दर्ज बताया गया था, जबकि नगर निगम के मूल रजिस्टर में उसी स्थान पर राजू कैवर्त का नाम दर्ज मिला।

इन दस्तावेजों के मिलान के बाद राजस्व विभाग के सामने नामांतरण प्रक्रिया में कथित तौर पर गलत तथ्यों और कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला सामने आया।

नामांतरण के बाद जमीन के 12 टुकड़े

आरोप है कि जमीन का नामांतरण कराने के बाद उसे एक साथ रखने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में बांटकर बिक्री की गई। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार जमीन को 12 अलग-अलग हिस्सों में बेचने की प्रक्रिया हुई।
इससे इस जमीन के छोटे-छोटे भूखंड खरीदने वाले कई लोग भी विवाद के दायरे में आ गए हैं। अब पूर्व में किए गए नामांतरण की वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं और राजस्व विभाग इसे निरस्त करने की कार्रवाई की तैयारी में है।

तहसीलदार बोले—दोषियों पर होगी कानूनी कार्रवाई

तहसीलदार के अनुसार, सुनवाई के दौरान प्रस्तुत मृत्यु प्रमाण पत्रों की जांच नगर निगम से कराई गई थी। जांच में प्रमाण पत्रों से संबंधित गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं। गलत तथ्यों के आधार पर कराया गया पूर्व नामांतरण शून्य किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।

तहसीलदार ने यह भी कहा कि यदि कूटरचित दस्तावेज तैयार कर शासन और राजस्व न्यायालय को गुमराह करने की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। दोषियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई भी की जाएगी।

अब बड़ा सवाल यह है कि मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सत्यता की जांच किए बिना जमीन का नामांतरण कैसे हो गया और नामांतरण के बाद जमीन के 12 हिस्सों की बिक्री तक मामला कैसे पहुंच गया। राजस्व विभाग की आगामी कार्रवाई से ही इस कथित जमीन फर्जीवाड़े में जिम्मेदार लोगों की भूमिका और स्पष्ट हो सकेगी।

Share.

About Us

हमारी यह समाचार पोर्टल वेबसाइट नवीनतम ख़बरों, विस्तृत विश्लेषण और सामयिक घटनाओं की सटीक जानकारी प्रदान करती है। कन्हैया सोनी द्वारा स्थापित और संपादित, हम निष्पक्ष और विश्वसनीय समाचारों के प्रति समर्पित हैं।

Contact Us

 Editor: कन्हैया सोनी

Contact No.: +91 89596 82168
Email : kaniyason2521@gmail.com

Follow For More

© 2025 Soni Narad Muni News. All Rights Reserved. Developed by Nimble Technology

Exit mobile version