प्रधानमंत्री मोदी का मुस्लिम प्रेम अचानक फूट पड़ा और उन्होंने ‘ईद’ के मौके पर ३२ लाख मुसलमानों के लिए ‘सौगात-ए-मोदी’ का एलान कर दिया। ईद के लिए यह खास तोहफा है। उस सौगात किट में क्या है? उसमें एक साड़ी, एक लुंगी, सेवई, चीनी आदि है। रमजान के ‘पाक’ महीने में भाजपा ने ३२ लाख मुसलमानों के घर जाकर ये सौगात बांटी और इसके लिए बीजेपी ने ३२ हजार कार्यकर्ताओं को ये सौगात बांटने का काम सौंपा था। भाजपा के इन कार्यकर्ताओं द्वारा मुस्लिम बस्तियों, मस्जिदों में जाकर मोदी की सौगात बांटने की तस्वीर धर्मभ्रष्ट हिंदुत्ववादियों को विचलित करने जैसी थी। ‘सौगात-ए-मोदी’ एक राजनीतिक ढोंग है और चुनाव के लिए शुरू किया गया मुसलमानों को रिझाने का प्रयास है। रमजान के मौके पर कई जगहों पर ‘दावत-ए-इफ्तार’ चल रहा है और बिहार में भाजपा के नेताओं ने इन इफ्तार पार्टियों में अपनी हाजिरी लगाई। दिल्ली में भी भाजपा के कई नेता और मंत्री इफ्तार पार्टियां कर रहे हैं। हम अधर्मी हैं, ऐसा दिखावा ये लोग निर्माण कर रहे हैं। मोदी और उनके जैसे लोग देश में अत्यधिक धार्मिक नफरत पैदा कर रहे हैं। ये लोग मुसलमानों पर हमला करने और उन्हें देशद्रोही साबित करने का एक भी मौका नहीं छोड़ते। उत्तर प्रदेश में तो योगी आदित्यनाथ ने ‘उर्दू’ भाषा पर प्रतिबंध लगाने का फरमान जारी किया था, लेकिन मोदी ने अब योगी के उर्दू विरोध की लुंगी ही उतार दी है। मोदी ने ईद के मौके पर जो ‘सौगात-ए-मोदी’ शुरू किया है, वो ‘सौगात’ शब्द और उसकी अवधारणा ही मूल रूप से उर्दू है। ऐसे में भाजपा का दोहरा आचरण बार-बार सामने आ रहा है। दरअसल, भाजपा मुसलमानों को अपनी आंखों के सामने नहीं चाहती, लेकिन भाजपा के पास मुसलमानों के लिए एक अलग अल्पसंख्यक विभाग है और उसके जरिए

 

सौगात-ए-मोदी’ का वितरण
हो रहा है। भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा के हाथों दिल्ली के निजामुद्दीन से ‘सौगात’ वितरण की शुरुआत हुई। यह मोदी और नड्डा ही थे, जिन्होंने लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए महाराष्ट्र के चुनाव में ‘वोट जिहाद’ की बांग देकर हिंदू और मुसलमानों के बीच दरार पैदा की थी और मुसलमानों से सावधान रहने को कहा था। ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ और ‘एक हैं तो सेफ हैं’ जैसे धार्मिक ध्रुवीकरण वाले नारे प्रचारित किए गए। मुसलमान वोट देने के लिए उतरें ही नहीं, इसके लिए जोर-जबरदस्ती के प्रयोग किए गए। प्रधानमंत्री मोदी की भाषा बेहद निम्न स्तर की थी। मुसलमान घुसपैठिये और देशद्रोही हैं। यदि आप भाजपा को वोट नहीं देंगे तो वे आपका घर, जमीन हड़प लेंगे, आपका मंगलसूत्र खींचकर भाग जाएंगे। आपके पास दो गायें हैं तो वे उनमें से एक गाय को खींचकर ले जाएंगे। मुसलमान आपको कंगाल कर देंगे, ऐसी नफरत भरी भाषा का प्रयोग कर मुसलमानों के खिलाफ दिमाग को भड़काने का काम मोदी ने किया। उन्हीं मोदी को ईद के मौके पर ‘सौगात’ बांटने की नौबत क्यों आ गई? या इसे एक ढोंग ही कहा जाए? मोदी और उनकी पार्टी की विचारधारा गरीब मुसलमानों के प्रति जहरीली है। मोदी अमीर मुसलमानों के लिए रेड कार्पेट बिछाते हैं। कतर के राजा का स्वागत करने के लिए मोदी स्वयं हवाई अड्डे पर जाते हैं उन्हें गले लगाते हैं। दुबई जाकर वहां के शेख साहेब की चमचागीरी करते हैं और यहां भारत में गरीब मुसलमानों के घरों पर नफरत से बुलडोजर चलवाते हैं। मुसलमानों की आजीविका के सारे व्यवसाय बंद हो जाएं, इसके लिए मोदी के लोग सतत परिश्रम करते हैं। महाराष्ट्र में तो मोदी के ‘नेपाली’

बौने अंधभक्त ने
मुसलमानों से हिंदू मटन न खरीदें, ऐसा फरमान दे डाला और इसे लेकर महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने ‘एक शब्द’ भी नहीं कहा। यही भाजपा वाले पिछले चार दिनों से मुस्लिम मोहल्लों में जाकर ‘मोदी की सौगात’ बांटते हुए, खजूर, सेवइयां, लड्डू, लुंगियां, साड़ियां बांटकर मुसलमानों को खुश करते नजर आए। ‘सौगात-ए-मोदी’ किट वाली लुंगियां ठोस हरे रंग की ही हों, इस पर मुंबई के भाजपा वालों की तिरछी निगाह थी और कुछ ने अपनी कमर पर इन हरी लुंगियों को पहनकर प्रात्यक्षिक भी किया। मुसलमानों को लुभाना चाहिए, ऐसा मोदी और उनके लोगों को अब लगने लगा है। यह ‘दांव’ लोकतंत्र के खिलाफ है। मुसलमानों का वोट भी हमें ही मिलता है, यह भविष्य काल में दिखाया जाएगा। कुल मिलाकर योजना यह लगती है कि मुस्लिम बहुल मोहल्लों और बूथों पर फर्जी मतदाता सूची, फर्जी वोटर और ईवीएम के जरिए ‘चोरी’ करके वोट भाजपा की झोली में डाले जाएंगे और फिर मुसलमानों ने मोदी को ‘सौगात’ दी है, ऐसी बांग भाजपावाले लगाएंगे। अर्थात भाजपा को भी कल की राजनीति के लिए वोट जिहाद की जरूरत महसूस होने लगी है। अगर बिहार जैसे राज्य में मुस्लिम-यादव मतदाता एकजुट हो जाएं तो भाजपा गठबंधन को चुनौती दी जा सकती है। उन चुनावों को देखते हुए भाजपा ने बिहार में ‘सौगात’ बांटने पर जोर दिया है। ईद के मौके पर भाजपा ने ३२ लाख गरीब मुसलमानों को राशन, कपड़े आदि बांटे। इसमें कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन अगर यह सामाजिक कार्य किसी अन्य राजनीतिक दल ने किया होता तो ‘वोट जिहाद’ का बांग लगाकर ‘हिंदू खतरे में’ का तांडव भाजपा के धर्मभ्रष्टों ने शुरू कर दिया होता। अब मोदी ने उन सभी धर्मभ्रष्टों को हरी लुंगी में लपेटकर मस्जिदों में ‘सौगात’ बांटने भेज दिया है। मोदीजी, आपका जवाब नहीं। अंधभक्तों को इस तरह मुंह के बल न गिराएं साहेब!

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