GST नंबर पर सवाल, ठेकेदार पंजीयन से रिटेल बिक्री का आरोप
बाहरी विक्रेताओं पर नियमों की अनदेखी और राजस्व नुकसान की शिकायत
कोरबा। औद्योगिक नगरी कोरबा में पिछले दो-तीन दिनों से फुटपाथ पर खुलेआम साइकिलों की बिक्री ने शहर की व्यापारिक व्यवस्था और टैक्स सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाहरी क्षेत्रों से आए विक्रेताओं द्वारा कथित रूप से बिना स्थानीय व्यापारिक अनुमति के फुटपाथ पर दुकान सजाकर साइकिलों की बिक्री की जा रही है। इससे जहां स्थानीय कारोबारियों में नाराजगी है, वहीं राज्य सरकार के राजस्व को संभावित नुकसान और ग्राहकों के हितों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
मामले को लेकर सामने आई हस्तलिखित शिकायत में दावा किया गया है कि संबंधित विक्रेता ग्राहकों को ‘राजेन्द्र सिंह’ के नाम से बिल जारी कर रहा है। शिकायत में बिल पर दर्ज GST नंबर को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि संबंधित GST पंजीयन छत्तीसगढ़ राज्य का नहीं है। वहीं, उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित व्यक्ति का GST पंजीयन ठेकेदार के रूप में दर्ज बताया जा रहा है।
🔴 ठेकेदार का GST, फिर साइकिलों की रिटेल बिक्री कैसे?
यही सवाल अब पूरे मामले का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। यदि किसी व्यक्ति का GST पंजीयन ठेकेदारी गतिविधि के लिए है, तो क्या उसी पंजीयन के आधार पर फुटपाथ पर साइकिलों की खुदरा बिक्री की जा सकती है? क्या उसके पास साइकिल बिक्री के लिए वैध व्यापारिक पंजीयन, स्थानीय निकाय की अनुमति और आवश्यक लाइसेंस मौजूद है?
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि आवश्यक दस्तावेज और अनुमति नहीं हैं, तो यह केवल फुटपाथ पर अतिक्रमण का मामला नहीं, बल्कि व्यापारिक नियमों और कर व्यवस्था की जांच का भी विषय है।
🟡 बिल ग्राहकों को, जिम्मेदारी किसकी?
फुटपाथ पर साइकिल खरीदने वाले ग्राहक के सामने सबसे बड़ा सवाल बिक्री के बाद की जिम्मेदारी का है। यदि साइकिल में खराबी आती है, वारंटी का दावा करना हो या पार्ट्स/सर्विस की जरूरत पड़े तो ग्राहक संबंधित विक्रेता तक कैसे पहुंचेगा?
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि स्थायी दुकान, स्थानीय सर्विस सेंटर और स्पष्ट व्यापारिक पहचान के अभाव में ग्राहक सस्ती कीमत के लालच में सामान तो खरीद सकता है, लेकिन बाद में उसे परेशानी उठानी पड़ सकती है।
🔥 प्रशासन की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल
शहर में फुटपाथ पर खुलेआम व्यापार चल रहा है तो संबंधित विभागों की नजर अब तक इस गतिविधि पर क्यों नहीं पड़ी? क्या व्यापारिक दस्तावेजों और GST पंजीयन की जांच हुई है? क्या स्थानीय निकाय से व्यवसाय संचालन की अनुमति ली गई है? और यदि अनुमति नहीं है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
स्थानीय व्यापारियों और जागरूक नागरिकों ने वाणिज्यिक कर (GST) विभाग तथा स्थानीय प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे मामले में GST पंजीयन, बिलिंग, व्यापारिक गतिविधि और स्थानीय लाइसेंस की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई के साथ-साथ राजस्व नुकसान की भरपाई और अवैध व्यापार पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।
अब देखना यह है कि शिकायत सामने आने के बाद संबंधित विभाग जांच और कार्रवाई करता है या फुटपाथ पर चल रहा यह कथित ‘साइकिल कारोबार’ यूं ही चलता रहेगा।

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