2003 के विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह सरकार की करारी हार में खराब सड़कों की बड़ी भूमिका रही थी। वहीं, अजीत जोगी के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में सड़कों की स्थिति इतनी बेहतर थी कि सीमाओं पर ही फर्क समझ में आ जाता था।

मौजूदा समय में छत्तीसगढ़ में फिर वही हालात बनते नजर आ रहे हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालात यह हैं कि विभागीय मंत्री और प्रदेश के मुखिया के क्षेत्रों में भी सड़कें बदहाल हैं, जिससे प्रशासनिक उदासीनता साफ झलकती है।
पीडब्ल्यूडी मंत्री के गृह जिले मुंगेली में नांदघाट मार्ग पर हालत बेहद खराब है। यहां से गुजरने वाले लोगों को भगवान राम याद आ जाते हैं। लोगों को 40 किलोमीटर तक अतिरिक्त चक्कर लगाकर सरगांव-पथरिया होते हुए मुंगेली जाना पड़ रहा है।

इसी तरह अंबिकापुर से जशपुर जाने वाले मार्ग पर बतौली से चराईडांड के बीच सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। कई जगहों पर सड़क के नाम पर सिर्फ गड्ढे ही नजर आते हैं, जिससे यात्रा बेहद कठिन और जोखिम भरी हो गई है।

स्थिति यह है कि अब टेंडर प्रक्रिया शुरू भी होती है तो काम पूरा होते-होते बरसात आ जाएगी। इसके बाद अक्टूबर के बाद चुनाव में सिर्फ डेढ़ साल का समय बचेगा, ऐसे में यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक नैरेटिव बन सकता है।
अगर हालात नहीं सुधरे तो यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर भी असर डाल सकता है और नरेंद्र मोदी, अमित शाह और नितिन गडकरी जैसे नेताओं के लिए भी चुनौती खड़ी कर सकता है।

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