कोरबा –
जिस देश में बच्चे रात-रात भर पढ़कर भर्ती परीक्षा की तैयारी करते हैं, वहीं कारोबारी टंडन जैसे लोग “सिलेक्शन होम डिलीवरी” का ठेका लिए घूमते नजर आ रहे हैं। दो करोड़ कैश, ज्वेलरी और अब भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र बेचने के आरोपों में घिरे टंडन की फाइलें ऐसी खुल रही हैं, जैसे कोई पुराना भ्रष्टाचार पैकेज हो — हर पन्ने पर नया खुलासा।
सूत्र बताते हैं कि टंडन ने शंकरनगर चौक पर रात के अंधेरे में पीड़ित को बुलाया और बड़े आत्मविश्वास से कहा— “पेपर चाहिए तो पैसा रखो, सिलेक्शन हम संभाल लेंगे।” 10वीं-12वीं से लेकर भर्ती परीक्षाओं तक, मानो पूरा शिक्षा विभाग जेब में रखा हो। रकम ली गई, वादे किए गए, लेकिन न पेपर मिला न पैसा वापस।
हैरानी की बात यह है कि 2018 से लेकर 2022 तक टंडन पर फ्रॉड, ठगी और अब पेपर सौदे जैसे आरोप लगते रहे, चालान भी पेश हुआ, वारंट भी जारी हुआ, लेकिन कानून उसे देखकर ऐसे निकल जाता रहा जैसे— “आज मूड नहीं है।”
सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं—
“अगर यही टैलेंट पढ़ाई में लगाया होता तो शायद टंडन खुद परीक्षा पास कर जाता।”
कोई कह रहा है—
“यह पेपर लीक नहीं, सिस्टम लीक केस है।”
अब सवाल ये नहीं है कि टंडन ने पेपर बेचा या नहीं, सवाल ये है कि
इतने सालों तक ये धंधा चला कैसे?
और किस-किस की चुप्पी इसमें शामिल रही?
फिलहाल जांच जारी है, लेकिन जनता को डर है कि कहीं ये मामला भी बाकी फाइलों की तरह “जांच जारी है” के नाम पर ठंडे बस्ते में न चला जाए। क्योंकि अगर ऐसा हुआ, तो अगली भर्ती परीक्षा का सिलेबस नहीं, रेट लिस्ट पहले आएगी।


