वक्फ संशोधन विधेयक राष्ट्रपति की मुहर लगते ही देश का कानून बन चुका है. नए कानून के तहत वक्फ के मैनेजमेंट में दूसरे धर्म के लोगों को शामिल होने का अवसर मिल सकेगा. बीजेपी सरकार का कहना है कि इससे वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर रोकथाम लगेगी.

जबकि विपक्ष इसे मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों पर हमला बता रहा है. नए वक्फ कानून को लेकर मुस्लिम संगठन ने कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए देश की सर्वोच्च अदालत से गुहार लगाई है. ऐसे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ फिर से बीजेपी के लिए मददगार बनेगा और वक्फ कानून को लेकर मुस्लिम समाज के बीच फैली भ्रांतियों को दूर कर फायदे बताने के काम करेगा?

मोदी सरकार का दावा है कि वक्फ कानून गरीब मुसलमानों के हित में है जबकि विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय के खिलाफ बताता है. मुसलमानों के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से लेकर जमियत उलेमा-ए-हिंद और जमात-ए-इस्लामी हिंद जैसे अहम संगठनों ने वक्फ कानून के खिलाफ मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. मुस्लिम संगठन ये बताने में जुटे हैं कि नए वक्फ कानून के जरिए सरकार मुसलमानों से वक्फ संपत्ति को छीन लेगी. इसे लेकर मुस्लिम समाज भी कशमकश की स्थित में है, जिससे बीजेपी को भले ही फर्क न पड़ रहा हो लेकिन बीजेपी के सहयोगी दलों की बेचैनी जरूर बढ़ गई है.

बीजेपी के सहयोगी दलों की बढ़ी बेचैनी

मोदी सरकार के लिए वक्फ बिल को पास कराने में नीतीश कुमार की जेडीयू से लेकर चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी, जयंत चौधरी की आरएलडी, चिराग पासवान की एलजेपी और जीतनराम मांझी की हम पार्टी का अहम रोल रहा था. लोकसभा और राज्यसभा में वक्फ बिल के वोटिंग पैटर्न को देखें तो साफ है कि अगर बीजेपी को सहयोगियों का साथ न मिला होता तो बिल को पास कराना आसान नहीं था. बीजेपी को भले ही मुस्लिम मतदाताओं की परवाह न हो लेकिन टीडीपी, जेडीयू, रालोद और चिराग पासवान की एलजेपी को मुस्लिम वोट की दरकार हमेशा रहती है.

विपक्षी दल अब बीजेपी के सहयोगी दलों को मुस्लिम विरोधी कठघरे में खड़ी करने की कवायद में जुट गए हैं. विपक्ष और मुस्लिम समाज भी मानता है कि बीजेपी अपने संख्याबल के आधार वक्फ बिल पास नहीं कार पाती. नीतीश-नायडू-चिराग अगर चाहते तो संसद में वक्फ बिल को पास होने से रोक सकते थे. ये बीजेपी का साथ नहीं देते तो मोदी सरकार कभी बिल पास नहीं करा पाती. बीजेपी के सहयोगी दलों को अब मुस्लिम वोटों की नाराजगी का खतरा मंडराने लगा है. विपक्ष और मुस्लिम संगठन ये बताने में जुटे हैं कि मोदी सरकार का मकसद सिर्फ मुसलमानों से नफरत फैलाना और हिंदुत्व की विचारधारा लागू करना है, जिसमें उन्हें मदद की है.

वक्फ कानून पर मुस्लिम सियासत गरमाई गई है. सीएए कानून के खिलाफ जिस तरह से मुस्लिम समुदाय ने आंदोलन खड़े किए थे, उसी तरह अब वक्फ के खिलाफ भी माहौल बनाने और विरोध प्रदर्शन का प्लान बनाया जा रहा है. सीएए आंदोलन मोदी सरकार के लिए चिंता का सबब बन गया था. यही वजह है कि मोदी सरकार वक्फ कानून पर कोई सियासी माहौल नहीं बनने देना चाहती. ऐसे में बीजेपी के लिए संघ ने मैदान में उतरने का फैसला किया है और मुस्लिमों के बीच सियासी माहौल बनाने की कवायद में है, जिसका अभियान शुरू हो गया है.

बीजेपी के लिए संघ बनेगा मददगार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से संबद्ध मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने वक्फ कानून को लेकर देशभर में फैली भ्रांतियों और अफवाहों को दूर करने का बीड़ा उठाया है. संघ से जुड़े हुए राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने ईद मिलन समारोह में मुसलमानों के लिए वक्फ कानून के फायदे गिनाने के लिए देश भर में 100 प्रेस कॉफ्रेंस और 500 सेमिनार करने का ऐलान किया. इस ईद मिलन समारोह में वक्फ संशोधन पर संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक इंद्रेश कुमार और आरएसएस संपर्क प्रमुख रामलाल शामिल हुए थे.

इंद्रेश कुमार ने साफ कहा कि वक्फ कानून मुस्लिम समुदाय के आत्मसम्मान, न्याय और समानता के अधिकार को और मजबूत करेगा. उन्होंने कहा कि संशोधन से उनका पारदर्शी और न्यायसंगत उपयोग सुनिश्चित होगा, जिससे समाज के सभी वर्गों को लाभ होगा. ये कानून किसी के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी के हित में है, जिससे भारतीय समाज में आपसी विश्वास और सहयोग को बढ़ावा मिलता है.

आरएसएस नेता रामलाल ने वक्फ संशोधन को मुस्लिम समुदाय के अंदर विश्वास और सद्भाव बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह बदलाव ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र को अमल में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि वो अपने-अपने क्षेत्रों में वक्फ कानून के सकारात्मक पहलुओं के बारे में जागरूकता फैलाएं, ताकि समाज का हर वर्ग इसके महत्व को समझ सके. इस तरह से संघ ने वक्फ कानून को लेकर मुस्लिम समुदाय के बीच सियासी माहौल बनाने का काम शुरू कर दिया है.

कानून के पक्ष में लिखे जा रहे लेख

वक्फ कानून को लेकर बीजेपी से जुड़े हुए मुस्लिम नेता वक्फ कानून के पक्ष में लेख लिख रहे हैं. दिल्ली हज कमेटी चेयरमैन से लेकर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष रहे आतिफ रशीद वक्फ कानून के समर्थन में लेख लिख चुके हैं. इसके जरिए ये बताने की कोशिश की है कि वक्फ कानून कैसे आम मुसलमानों के हित में है. अभी तक वक्फ संपत्तियों पर सिर्फ कुछ मुस्लिमों और कुछ मिल्ली तंजीमों का ही रसूख रहा है. वक्फ संपत्तियों का लाभ देश के करीब दो सौ रसूख मुस्लिम परिवार ही उठा रहे हैं, लेकिन वक्फ कानून बन जाने के बाद इसका लाभ पसमांदा मुसलमानों को भी मिल सकेगा. इस तरह पिछड़े मुस्लिमों के लिए फायदेमंद बताया जा रहा है.

बीजेपी के मुस्लिम नेता यह बताने में जुटे हैं कि मोदी सरकार जब भी मुसलमानों के विकास की बात करती है या फिर कदम उठाती है, विपक्ष हैरान और परेशान हो जाता है. कुछ राजनीतिक दल मुस्लिम समुदाय को गुमराह करके अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि मोदी सरकार मुस्लिम समाज के विकास के लिए काम कर रही है. नए कानून से वक्फ संपत्ति का सही उपयोग सुनिश्चित होगा और मुस्लिम समुदाय के गरीब और पिछड़े वर्ग को लाभ मिलेगा.

बीजेपी नेता वक्फ के गिना रहे फायदे

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने भी वक्फ कानून के समर्थन में अपने कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं. वो मुस्लिम इलाकों में जाकर यह बताने में जुटे हैं कि कैसे मोदी सरकार के नए कानून बनाने से आम मुस्लिमों को वक्फ का लाभ मिल सकेगा. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने दिल्ली के शाहीनबाग क्षेत्र में वक्फ कानून के समर्थन में एक कार्यक्रम किया, जिसमें उन्होंने यह बताने की कोशिश की है कि कैसे वक्फ कानून मुसलमानों के हित में मोदी सरकार के द्वारा उठाया गया ऐतिहासिक कदम है.

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष आतिफ रशीद कहते हैं कि पहले तो मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि इस विरोध का मतलब क्या है? सभी महत्वपूर्ण दलों को जेपीसी में जगह दी गई है और शामिल किया गया है. सभी के सुझाव लेकर कानून बनाया गया है. ऐसे में जो लोग विरोध कर रहे हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या उन्होंने कानून पढ़ा हैृ. आप न तो इसे पढ़ने के लिए तैयार हैं और न ही आप इस पर बहस करना चाहते हैं. केवल विरोध करना चाहते हैं और मनमानी दिखा रहे हैं. मोदी सरकार ने इस्लामिक शरीयत के लिहाज से वक्फ कानून बनाया है, जिसमें पिछड़े मुस्लिम, महिलाओं को जगह देने की कोशिश की है. अभी तक मुस्लिम समाज का एक तबका ही वक्फ कानून का फायदा उठा रहा था, लेकिन अब गरीब और बेवाओं व यतीमों को वक्फ की आय का लाभ मिलेगा.

वक्फ कानून पर अशराफ बनाम पसंमादा

बीजेपी वक्फ कानून के विरोध को अशराफ बनाम पसमांदा बनाने की कवायद में है. बीजेपी के मुस्लिम नेता यह बताने में लगे हैं कि वक्फ संपत्तियों का लाभ अभी तक मुसलमानों का अशराफ तबका यानी उच्च वर्ग के मुस्लिम ही उठा रहे थे, लेकिन नए कानून बनने के बाद इसका लाभ पिछड़े यानी पसमांदा मुस्लिमों को मिल सकेगा. आतिफ रशीद कहते हैं कि अशराफ मुसलमान कभी मजहब का चोला पहनकर तो कभी मुस्लिम पर्सनल लॉ की शक्ल में तो कभी तथाकथित छद्म धर्म निरपेक्ष सियासी पार्टियों की शक्ल में मुस्लिम समाज को भटकाने के लिए सड़कों पर आ जाता है. वक्फ का लाभ अभी तक सिर्फ अशराफ मुस्लिमों ने ही उठाया है, लेकिन अब जब मुस्लिम महिलाओं और पिछड़े वर्ग के मुस्लिमों को मिलने की बारी आई तो विरोध कर रहे हैं.

वक्फ कानून के समर्थन में पसमांदा मुस्लिम खुलकर उतर गया है, जो मोदी सरकार का शुक्रिया भी अदा कर रहा है और अपने हित में बता रहा. पिछड़े मुसलमानों का कहना है कि पसमांदा मुसलमानों और मुस्लिम महिलाओं को भारत की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कानून लाया गया है. इसे लेकर पसमांदा संगठन भी सक्रिय हो गए हैं और जगह-जगह कार्यक्रम करके यह बताने की कोशिश करेगी कि कैसे यह कानून पिछड़े मुस्लिमों के हित में है. इस तरह वक्फ बिल में मुस्लिम समाज कैसे लाभ मिलेगा, उन सारे बिंदुओं को कानून में हाईलाइट करके बताया जा रहा है.

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