महाराष्ट्र में विगत दिनो को एक लीडर ट्रांसप्लांट हुआ। 42 साल की पत्नी ने अपने पति को लीवर का एक हिस्सा डोनेट किया था। वह महिला हडपसर की रहने वाली थी। उसे उम्मीद थी कि उसका पति ठीक हो जाएगा। लेकिन सर्जरी के कुछ घंटों बाद ही उसके पति की मौत हो गई। महिला को पति की मौत की सूचना नहीं दी गई। हालांकि ट्रांसप्लांट के बाद उसकी हालत भी खराब हो गई और पति की मौत के एक हफ्ते बाद महिला ने भी दम तोड़ दिया। यह घटना पुणे के सह्याद्री हॉस्पिटल्स में हुई।

महिला के रिश्तेदारों ने कहा कि सर्जरी से पहले महिला पूरी तरह स्वस्थ थी। एक सीनियर लीवर ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ ने कहा कि इस तरह से एक डोनर की मौत होना दुर्लभ मामला है। हालांकि, लाइव ऑर्गन ट्रांसप्लांट एक जटिल प्रक्रिया होती है।

पूरी तरह स्वस्थ्य थीं कामिनी

बापू बालकृष्ण कोमकर (49) एक प्राइवेट फैक्ट्री में काम करते थे। अचानक उनके लीवर में बीमारी का पता चला और फिर सब खत्म हो गया। डॉक्टर्स ने लीवर ट्रांसप्लांट की सलाह दी। डोनर की बात आई तो पत्नी कामिनी कोमकर (42) राज ही गईं। कामिनी की जांचें हुईं। वह पूरी तरह स्वस्थ्य थीं। उनका लीवर भी बापू से मैच कर गया। सब ठीक थी और फिर अचानक कामिनी की मौत ने उनके परिवार को सदमे में ला दिया है। उनके रिश्तेदारों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिलने के बाद अस्पताल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।

अस्पताल प्रशासन ने जारी किया बयान

अस्पताल ने इस मामले में बयान जारी किया है। उन्होंने कहा, ‘सह्याद्री हॉस्पिटल्स भारी मन से इस दुखद घटना पर शोक व्यक्त करता है। हाल ही में एक जटिल सर्जरी के बाद मरीजों की जान चली गई। हम पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। लिविंग डोनर लीवर ट्रांसप्लांट सबसे जटिल प्रक्रियाओं में से एक है। इस मामले में, मरीज को कई जटिलताएं थीं। वह एक हाई-रिस्क मरीज था। प्रोटोकॉल के अनुसार, परिवार और डोनर को पहले से ही इन जोखिमों के बारे में बता दिया गया था।

 

अस्पताल ने आगे कहा कि सर्जरी स्टैंडर्ड मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार की गई थी। दुर्भाग्य से, ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को कार्डियोजेनिक शॉक लगा और उसे बचाया नहीं जा सका। डोनर शुरू में ठीक हो गई थी, लेकिन बाद में उसे हाइपोटेंसिव शॉक और मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन हो गया। इसे एडवांस ट्रीटमेंट से भी कंट्रोल नहीं किया जा सका। इस दुखद समय में हम शोक संतप्त परिवार के साथ हैं।’

भारी सदमे में परिवार

मृतक महिला के भाई बलराज वाडेकर ने कहा, ‘कामिनी एक हाउस वाइफ थी। उसे डायबिटीज या हाइपरटेंशन कुछ नहीं था। मेरे जीजाजी ने भी लगभग 10 साल पहले शराब पीना छोड़ दिया था। ट्रांसप्लांट 15 अगस्त को हुआ। कुछ ही घंटों में, मेरे जीजाजी का निधन हो गया। हमें उतना सदमा नहीं लगा, क्योंकि उनकी हालत गंभीर थी और हम मानसिक रूप से सारी परिस्थिति के लिए तैयार थे। लेकिन मेरी बहन की मौत हमारे लिए एक बहुत बड़ा झटका है। सर्जरी के बाद, उसे ऑब्जरवेशन के लिए ICU में शिफ्ट किया गया। उसे डिस्चार्ज नहीं किया गया था। डॉक्टरों ने सर्जरी से पहले कहा था कि उसे 5% खतरा है, लेकिन अब हमने उसे खो दिया है।’

घर गिरवी रखकर कराया था ट्रांसप्लांट

दंपति ने लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी का खर्च उठाने के लिए अपना घर गिरवी रख दिया था। उनके परिवार में एक बेटा (20) है, जो कॉलेज का छात्र है, और एक बेटी है, जो कक्षा VII में पढ़ती है। वाडेकर ने बताया कि इस प्रक्रिया पर 20 लाख रुपये खर्च हुए।

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