कोरबा। विधानसभा और नगर निगम चुनाव के दौरान मंत्री लखन लाल देवांगन द्वारा दिए गए वादे आज ज़मीनी हकीकत में दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। चुनावी मंचों से बार-बार कहा गया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन गरीबों के भी पक्के मकान बनेंगे जिनके पास पट्टा नहीं है, और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवार बिजली बिल, आधार कार्ड, राशन कार्ड और मकान टैक्स के आधार पर पात्र माने जाएंगे।
लेकिन आज स्थिति यह है कि गरीब परिवार इन्हीं कागज़ों को लेकर नगर निगम के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। निगम के अधिकारी साफ शब्दों में कह रहे हैं—
“ऐसी कोई योजना नहीं है, मकान सिर्फ पट्टा वालों का ही बनेगा।”
इस विरोधाभास की सबसे बड़ी कीमत गरीब चुका रहा है। कोई 50-50 फोटो कॉपी करवा रहा है, तो कोई रोज़गार छोड़कर अधिकारियों और पार्षदों के पीछे भटक रहा है, और अंत में निराश होकर खाली हाथ लौट रहा है।
समाचार में यह सवाल भी उठना जरूरी है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में तैयार किए गए 9,583 पट्टे आज भी कलेक्टोरेट में धूल खा रहे हैं। यदि इन पट्टों का तुरंत वितरण कर दिया जाए, तो हजारों गरीब परिवारों का पक्का मकान बनने का रास्ता साफ हो सकता है।
आज जरूरत है भाषण नहीं, स्पष्ट नीति और तत्काल निर्णय की—
वरना गरीब के लिए “मकान” सिर्फ चुनावी नारा बनकर ही रह जाएगा।


