आपने खाने का जो तेल खरीदा है उसमें तेल कितना है? सवाल अजीब लग सकता है लेकिन सच यह है कि आप जिस पैकेट को एक लीटर का मानकर खरीद रहे हैं उसमें 800 ग्राम, 870 ग्राम, 900 ग्राम या 910 ग्राम तेल हो सकता है। आम उपभोक्ताओं के साथ इसी अंदाज में खेल हो रहा है।

नाप-तौल के सरकारी नियमों में हुए संशोधन ने निर्माता-विक्रेताओं को पैकिंग में मनमानी करने की छूट दे दी है। बाजार में उपभोक्ताओं को भ्रमित कर चतुराई से ठगा जा रहा है। बदले नियम और पैकिंग के खेल से ज्यादातर उपभोक्ता अनजान हैं।

चालाकी पर अंकुश लगाने की मांग

अब खाद्य तेल उद्योग की राष्ट्रीय संस्था ने ही चालाकी के इस व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए आवाज उठाई है। इंदौर के साथ देशभर के बाजारों में खाद्य तेल की पैकिंग में मनमानी मात्रा से खेल किया जा रहा है।

नईदुनिया ने शहर के बाजारों का जायजा लिया तो एक लीटर के समान आकार के पाउच में 800 ग्राम, 815 ग्राम, 870 ग्राम, 900 ग्राम और 910 ग्राम तेल मिला। तमाम कंपनियों ने मानक एक लीटर तेल के पैकेट बेचना ही बंद कर दिए। कुछ बड़े ब्रांड ही एक लीटर (910 ग्राम) मानक मात्रा के पैक बना रहे हैं। ये ही कंपनियां पैक पर बड़े अक्षर में लीटर में मात्रा भी छाप रही हैं।

 

 

उपभोक्ता को मुश्किल से दिखता है ब्योरा

बड़े पैकेट में कम तेल बेचने वाली कंपनियां प्रिंटर की स्याही से बैच नंबर के साथ वजन का ब्योरा लिख रही हैं जो आम उपभोक्ता मुश्किल से देख सके। आम उपभोक्ता ब्रांड या सुपर स्टोर में बोर्ड पर लिखी कीमत की तुलना कर या दुकानदार के बताए दाम को देखकर तेल खरीद रहा है।

उसका ध्यान इस बात पर जा ही नहीं रहा है कि जिस तेल के पैकेट पर उसे कीमत कम दिख रही है संभवत: वह मात्रा के मायने से उसे महंगा पड़ रहा है। अब पैकेट बंद देसी घी और वनस्पति घी में भी ऐसा ही खेल शुरू हो गया है।

 

बदले नियम तो बढ़ा भ्रम

द लीगल मेट्रोलाजी (पैकेजिंग कमोडिटीज) रूल्स 2011 के अंतर्गत शेड्यूल-2 में तेल-घी जैसी वस्तुओं के लिए पैकिंग की मानक मात्रा निर्धारित थी। इन नियमों में 2022 में संशोधन कर दिया गया और शेड्यूल-2 हटा दिया गया। इसके साथ स्टैंडर्ड पैकिंग का कानून खत्म होते ही बाजार में 800 से 900 ग्राम के पैकेट समान आकार में उतार दिए गए।

खाद्य तेल उत्पादकों के शीर्ष संगठनों ने मई में केंद्र सरकार के सामने बैठक में इस मुद्दे को उठाया कि कई विक्रेता अब एक लीटर के बजाय 800-900 ग्राम के बीच मनमाने पैक बाजार में उतारकर उपभोक्ताओं को कम दाम का लालच देते हैं।

वे कारोबारी जो नियम से एक लीटर का पैक बेच रहे हैं सामान्य तौर पर उनका तेल उपभोक्ताओं को महंगा दिखता है और वे बाजार से बाहर हो रहे हैं। ऐसे में स्टैंडर्ड पैकिंग का नियम फिर लागू करना चाहिए। कुछ कारोबारी भ्रमित करने के लिए तापमान का सहारा भी ले रहे हैं।

 

यह है मानक मात्रा

 

नियम अनुसार सोयाबीन, मूंगफली, सरसों या राइसब्रान जैसे एक लीटर तेल का वजन कम से कम 910 ग्राम होना चाहिए। यह मात्रा 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही दर्शाना चाहिए। वहीं मानक तौर पर एक लीटर घी की मात्रा वजन के लिहाज से 900 से 902 ग्राम (45 डिग्री तापमान) होना चाहिए। नारियल तेल, पाम आइल जैसे फैट वाले तेल तथा वनस्पति घी का वजन 893 ग्राम जरूरी है।

नियम बदलना जरूरी है

 

 

उपभोक्ताओं को भ्रमित किया जा रहा है। बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी खत्म हो रही है। मई में हमने बैठक में मुद्दा उठाया था। सप्ताहभर पहले डायरेक्टर लीगल मेट्रोलाजी और उपभोक्ता मामले के मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा है कि तेल-घी के लिए शेड्यूल-2 लागू कर मानक पैकिंग का नियम लागू किया जाए। सुझाव दिया भी दिया है कि वजन के लिहाज से 50, 100, 200, 250, 500 ग्राम व एक, दो, पांच किलो और उसके गुणक में पैकिंग की ही अनुमति दी जाए। सभी राज्यों के प्रमुख तेल उत्पादक संगठन इस पर सहमत हैं। – डॉ. बीवी

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