कोरबा के इंदिरा नगर में एक बार फिर दहशत का माहौल है। रेलवे प्रशासन के अधिकारी दोबारा इलाके में पहुंचे और साफ शब्दों में चेतावनी दी कि 22 तारीख तक का समय आखिरी है, इसके बाद अतिक्रमण के नाम पर मकानों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। यह जानकारी रेलवे की ओर से मौखिक ही नहीं, बल्कि लिखित रूप में भी दी गई है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जिन परिवारों को पहले 7 दिन की मोहलत देकर राहत की सांस दी गई थी, अब वही मोहलत सिर्फ एक औपचारिकता साबित होती नजर आ रही है। बिना पुनर्वास और स्थायी समाधान के नोटिस पर नोटिस ने इंदिरा नगर के सैकड़ों परिवारों को फिर असमंजस में डाल दिया है।
इधर, वार्ड पार्षद टामेश अग्रवाल को रेलवे प्रशासन की ओर से स्थिति की जानकारी दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को नगर निगम के घेराव की तैयारी की जा रही है। इसको लेकर इंदिरा नगर में चर्चाएं तेज हैं और लोगों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है।
इलाके के लोग सवाल पूछ रहे हैं—
क्या 22 तारीख के बाद इंसानियत बचेगी या सिर्फ बुलडोजर चलेगा?
क्या प्रशासन के पास कोई ठोस पुनर्वास योजना है या गरीबों को यूं ही बेघर किया जाएगा?
नारद मुनि न्यूज़ ने जिस मुद्दे को पहले उठाया था, वह अब और गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है।
इंदिरा नगर में राहत नहीं, अब सीधे संघर्ष की आहट सुनाई दे रही है।


